आपको पता चला है कि आप प्रेगनेंट हैं। खुशी का माहौल है, लेकिन अचानक 6 वीक के आसपास आपको हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग दिखती है। यह स्थिति बहुत डराने वाली लग सकती है, लेकिन आपको यह जानना जरूरी है कि शुरुआती प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना उतना असामान्य नहीं है जितना आप सोच रही हैं। लगभग 15 से 25 प्रतिशत महिलाओं को फर्स्ट ट्राइमेस्टर में कुछ न कुछ ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होती है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर ब्लीडिंग सामान्य है या इसे नजरअंदाज कर देना चाहिए। ज्यादातर केसों में हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग से कोई नुकसान भले न होता हो लेकिन कुछ पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत होती है। 6 week pregnancy me bleeding in hindi आर्टिकल में हम समझेंगे कि 6 वीक की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग क्यों हो सकती है, किस तरह की ब्लीडिंग में चिंता नहीं करनी चाहिए और कब तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
6 वीक की प्रेगनेंसी एक बहुत सेंसिटिव समय होता है। इस समय तक भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (Embryo) गर्भाशय की परत मतलब एंडोमेट्रियम से पूरी तरह जुड़ चुका होता है और उसकी ग्रोथ भी तेजी से हो रही होती है।
6 वीक में एम्ब्रीओ का आकार लगभग एक मटर के दाने, यानी करीब 4 से 5 मिलीमीटर जितना होता है। इस समय दिल की धड़कन शुरू हो चुकी होती है यानी हार्टबीट आ चुकी होती है जिसे अल्ट्रासाउंड में देख सकते हैं।
गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) में खून की सप्लाई बहुत तेजी से बढ़ रही होती है। एम्ब्रीओ को पोषण देने के लिए नई खून की नलियां बन रही होती हैं। प्लेसेंटा (placenta) बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी होती है। यह सब बहुत तेजी से हो रहा होता है और इस दौरान कभी कभी थोड़ा खून बाहर आ सकता है। सर्विक्स (cervix) यानी गर्भाशय का मुंह भी इस समय बहुत संवेदनशील हो जाता है क्योंकि वहां खून का बहाव बहुत बढ़ जाता है।
hCG हार्मोन तेजी से बढ़ रहा होता है जो प्रेगनेंसी को बनाए रखता है। प्रोजेस्टेरॉन भी हाई होता है जो यूट्रस की लाइनिंग को मजबूत रखने का काम करता है। इन सभी बदलावों की वजह से शरीर में बहुत कुछ एक साथ हो रहा होता है।
6 वीक में ब्लीडिंग के कई ऐसे कारण हैं जो गंभीर नहीं हैं। सबसे कॉमन वजह इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (implantation bleeding) होती है। हालांकि यह आमतौर पर 4 से 5 वीक के आसपास होती है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह 6 वीक तक भी दिख सकती है।
सर्विक्स पर खून का बहाव बढ़ने से भी ब्लीडिंग हो सकती है क्योंकि प्रेगनेंसी में सर्विक्स बहुत संवेदनशील हो जाती है। कई बार संबंध बनाने के बाद, या अंदरूनी जांच के बाद, या कभी कभी भारी सामान उठाने से भी हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। यह सर्विकल इरिटेशन की वजह से होती है और इसमें कोई खतरा नहीं है।
सबकोरियोनिक हीमेटोमा (subchorionic hematoma) भी 6 वीक प्रेगनेंसी ब्लीडिंग का एक कारण हो सकता है। इसमें एंडोमेट्रियम और प्लेसेंटा के बीच खून का एक छोटा सा जमाव हो जाता है। यह अल्ट्रासाउंड में दिखता है। ज्यादातर छोटे हीमेटोमा अपने आप ठीक हो जाते हैं और प्रेगनेंसी पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। लेकिन बड़े हीमेटोमा में डॉक्टर आराम करने की सलाह दे सकते हैं।
कुछ कारण ऐसे हैं जिनमें तुरंत ध्यान देना जरूरी है। मिसकैरेज इनमें सबसे बड़ी चिंता है। पहली तिमाही में लगभग 10 से 15 प्रतिशत प्रेगनेंसी में मिसकैरेज हो सकता है। मिसकैरेज में ब्लीडिंग धीरे धीरे बढ़ती है, क्रैम्प तेज होते हैं, और कभी कभी टिश्यू भी निकल सकता है। हालांकि, सिर्फ ब्लीडिंग होने का मतलब मिसकैरेज नहीं है। बहुत सी महिलाओं को ब्लीडिंग होती है और उनकी प्रेगनेंसी पूरी तरह सामान्य रहती है।
एक्टॉपिक प्रेगनेंसी भी एक सीरियस कंडीशन है जिसमें भ्रूण यूट्रस के बजाय फैलोपियन ट्यूब या किसी और जगह जुड़ जाता है। इसमें एक तरफ तेज दर्द होता है, ब्लीडिंग हो सकती है, और कभी कभी कंधे में भी दर्द होता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसमें तुरंत इलाज जरूरी है।
मोलर प्रेगनेंसी एक रेयर कंडीशन है जिसमें प्लेसेंटा असामान्य रूप से बढ़ने लगता है और भ्रूण ठीक से नहीं बनता। इसके सिम्पटम्स ब्लीडिंग, बहुत ज्यादा उल्टी, यूट्रस का सामान्य से बड़ा होना, और असामान्य रूप से हाई hCG हैं।
ब्लीडिंग का रंग और मात्रा आपको कुछ जानकारी दे सकते हैं, लेकिन इनसे पक्का नतीजा नहीं निकाला जा सकता। लाइट पिंक या ब्राउन रंग की स्पॉटिंग आमतौर पर कम गंभीर होती है। ब्राउन रंग बताता है कि खून पुराना है और कुछ समय से अंदर था, जो अक्सर इम्प्लांटेशन या हल्की सर्विकल ब्लीडिंग का संकेत है।
चमकीला लाल खून ताजा ब्लीडिंग का सिगनल होता है। अगर यह बहुत थोड़ा है और कुछ घंटों में बंद हो जाता है, तो हो सकता है यह सर्विकल इरिटेशन हो। लेकिन अगर चमकीला लाल खून लगातार आ रहा है, मात्रा बढ़ रही है, और साथ में क्रैम्प भी हैं, तो यह सीरियस कंडीशन हो सकती है।
क्लॉट या टिश्यू आना भी किसी सीरियस कंडीशन की तरफ इशारा हो सकता है। अगर ब्लीडिंग में क्लॉट आ रहे हैं या कुछ ठोस सा निकल रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। यह मिसकैरेज का लक्षण हो सकता है।
कई बार हल्की ब्लीडिंग में भी एक्टॉपिक प्रेगनेंसी हो सकती है, और कभी हैवी ब्लीडिंग के बाद भी प्रेगनेंसी सामान्य रहती है। इसलिए हर तरह की ब्लीडिंग में डॉक्टर से बात करना सबसे जरूरी है।
ब्लीडिंग हल्की है, दर्द नहीं है और आप सामान्य महसूस कर रही हैं, तो तुरंत इमरजेंसी जाने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगले 24 घंटे में डॉक्टर को जरूर बताएं, ज्यादा शारीरिक मेहनत न करें, भारी सामान न उठाएं और पर्याप्त पानी पीती रहें।
जब आप डॉक्टर के पास जाती हैं, तो सबसे पहले TVS अल्ट्रासाउंड किया जाता है। 6 वीक में अल्ट्रासाउंड से गेस्टेशनल सैक (gestational sac), यॉक सैक (yolk sac), और कई बार हार्टबीट भी दिख सकती है। अगर हार्टबीट दिख रही है तो यह बहुत अच्छी बात है, इस कंडीशन में मिसकैरेज की संभावना काफी कम हो जाती है।
hCG लेवल भी चेक किया जाता है। सामान्य प्रेगनेंसी में hCG हर 48 से 72 घंटों में लगभग दोगुना होता है। अगर hCG ठीक से बढ़ रहा है, तो प्रेगनेंसी सही दिशा में है।
अगर hCG गिर रहा है या बहुत धीमे बढ़ रहा है, तो 48 घंटे बाद दोबारा hCG टेस्ट करवाया जाता है ताकि बढ़ोतरी का पैटर्न देखा जा सके।
इसका इलाज, ब्लीडिंग की वजह के हिसाब से होता है।
सब कुछ सामान्य दिख रहा होता है तो डॉक्टर आराम करने, तनाव न लेने और कुछ हफ्ते बाद फॉलो-अप की सलाह देते हैं।
6 week pregnancy me bleeding सिर्फ एक अकेली घटित होने वाली घटना नहीं है, बल्कि इस समय आपके शरीर में बहुत सरे बदलाव एक साथ हो रहे होते हैं। इस समय एम्ब्रीओ, प्लेसेंटा और यूट्रस तीनों एक साथ तेजी से बदल रहे होते हैं, और इसी कारण हल्की ब्लीडिंग दिख सकती है।
लेकिन यही समय ऐसा भी होता है जब शरीर किसी समस्या का शुरुआती संकेत देता है। इसलिए ब्लीडिंग को सिर्फ़ सामान्य या असामान्य कहकर छोड़ देना सही अप्रोच नहीं है। आपको यह समझना होता है कि इस ब्लीडिंग का पूरा पैटर्न क्या है यानी साइकल के किस दिन, किस तरह के दर्द के साथ, और कितनी मात्रा में ब्लीडिंग हुयी है ।
6 week pregnancy me bleeding in hindi समझ लेने का मतलब सिर्फ़ ब्लीडिंग क्यों हुई, यह जानना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि आपके शरीर का यह सिगनल किस तरफ इशारा कर रहा है।