AMH टेस्ट यानी एंटी-मुलेरियन हार्मोन (Anti-Mullerian Hormone) एक सिम्पल ब्लड टेस्ट है जो बताता है कि आपकी ओवरीज़ में कितने अंडे बचे हैं। इसे ओवेरियन रिज़र्व (ovarian reserve) टेस्ट भी कहते हैं। बहुत सी महिलाएँ तब AMH टेस्ट कराती हैं जब कंसीव करने में दिक्कत आती है, लेकिन सच ये है कि कुछ स्थितियों में यह टेस्ट पहले भी करा लेना चाहिए। किस उम्र में AMH कराना ज़रूरी है, नॉर्मल रेंज क्या होती है, रिज़ल्ट कम आए तो क्या ऑप्शन हैं, और IVF प्लानिंग में AMH का क्या रोल है — इन सब सवालों का जवाब इस आर्टिकल में मिलेगा।
AMH एक हार्मोन है जो ओवरीज़ में मौजूद छोटे फॉलिकल्स (antral follicles) से बनता है। जितने ज़्यादा फॉलिकल्स होंगे, AMH लेवल उतना ज़्यादा होगा। यह हार्मोन ओवेरियन रिज़र्व का इंडिकेटर है यानी बताता है कि आपकी ओवरीज़ में अभी कितने एग बचे हैं। AMH आपकी पीरियड साइकिल से ज़्यादा प्रभावित नहीं होता, इसलिए AMH test महीने के किसी भी दिन करा सकते हैं। AMH टेस्ट सिर्फ़ एग्स की क्वांटिटी बताता है, क्वालिटी नहीं। एग्स की क्वालिटी महिला की उम्र, लाइफ़स्टाइल, और जेनेटिक्स पर निर्भर करती है।
हर महिला को AMH टेस्ट कराने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन कुछ सिचुएशन में यह टेस्ट बहुत ज़रूरी हो जाता है।
अगर आप अभी बच्चे का प्लान नहीं कर रही लेकिन फ़्यूचर में करना चाहती हैं, तो AMH टेस्ट से अंदाज़ा लग सकता है कि कितना वक़्त है। इससे एग फ्रीज़िंग का निर्णय लेने में मदद मिलती है।
रेगुलर अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के बावजूद 1 साल (35+ उम्र में 6 महीने) में प्रेगनेंसी नहीं हुयी है तो AMH टेस्ट फ़र्टिलिटी इवैल्यूएशन (Fertility Evaluation) यानी आपकी माँ बनने की क्षमता को जानने का पहला स्टेप है।
PCOS में AMH लेवल अक्सर नॉर्मल से ज़्यादा आता है क्योंकि ओवरीज़ में बहुत सारे छोटे फॉलिकल्स होते हैं। AMH टेस्ट PCOS को पता करने में भी मदद करता है।
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले AMH टेस्ट ज़रूरी होता है। इससे डॉक्टर को पता चलता है कि ओवेरियन स्टिम्युलेशन में कितनी दवाई देनी है और उससे कितने एग्स मिलने की उम्मीद है।
अगर आपके परिवार में आपकी माँ या बहन को 40 वर्ष की आयु से पहले मेनोपॉज़ हुआ है तो AMH टेस्ट से अपना ओवेरियन रिज़र्व चेक करना अच्छा रहता है।
एंडोमेट्रियोमा (endometrioma), सिस्ट, या किसी और वजह से ओवरी की सर्जरी के बाद AMH टेस्ट लेवल गिर सकता है। सर्जरी के बाद माँ बनने की प्लानिंग करने के लिए AMH टेस्ट ज़रूरी है।
कैंसर ट्रीटमेंट शुरू होने से पहले AMH चेक करने से प्रजनन संरक्षण (एग फ्रीज़िंग) का सही निर्णय लिया जा सकता है।
AMH लेवल उम्र के साथ नैचुरली कम होता जाता है। यह नॉर्मल प्रोसेस है।
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IVF में AMH टेस्ट बहुत जरुरी है। इससे डॉक्टर यह समझते हैं कि ओवरी स्टिमुलेशन (ovarian stimulation) का रिस्पॉन्स कैसा रहेगा और उसी के अनुसार दवाइयों की डोज़ तय की जाती है।
AMH से यह अंदाज़ा भी लगाया जाता है कि एग रिट्रीवल के दौरान लगभग कितने एग मिल सकते हैं।
यहाँ एक बात समझना जरूरी है कि AMH कम होने का मतलब यह नहीं है कि IVF सफल नहीं होगा। कई बार कम एग्स में भी अच्छी क्वालिटी का एम्ब्रीओ (embryo) बन सकता है, और सफल प्रेगनेंसी संभव हो सकती है।
AMH टेस्ट आपकी फ़र्टिलिटी को समझने का एक जरुरी टूल है लेकिन इस अकेले टेस्ट से पूरी जानकारी नहीं मिलती । 30 साल के बाद, ख़ासकर अगर फ़ैमिली प्लानिंग में देरी है या कंसीव नहीं हो रहा, तो AMH टेस्ट ज़रूर कराएँ।
अगर लेवल कम आए तो परेशान न हों, क्योंकि कम ओवेरियन रिज़र्व का मतलब है ओवरीज़ में एग्स की संख्या कम बची है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि प्रेगनेंसी संभव नहीं है। कम AMH के साथ भी नेचुरल प्रेगनेंसी हो सकती है, बशर्ते एग्स की क्वालिटी अच्छी हो।
अपने फ़र्टिलिटी एक्सपर्ट से बात करें। AMH लेवल के हिसाब से IVF, एग फ़्रीज़िंग, या दूसरे ऑप्शन प्लान किए जा सकते हैं।