कुछ महिलाओं को पीरियड मिस होने से पहले ही अंदाज़ा हो जाता है कि कुछ बदल रहा है। शरीर में एक अलग-सी थकान, खाने की आदतों में बदलाव, या बस एक अजीब-सी फीलिंग जो शब्दों में बयान करना मुश्किल है। अगर आप भी कुछ ऐसा महसूस कर रही हैं और सोच रही हैं कि कहीं यह प्रेगनेंसी तो नहीं, तो इस आर्टिकल में आपके सारे सवालों के जवाब मिलेंगे।
यहाँ हम उन pregnancy ke shuruati lakshan in hindi बताने जा रहे हैं जिससे आपको अपने अंदर हो रहे बदलावों की पूरी जानकारी मिलेगी साथ ही आप समझ पाएंगी कि ये बदलाव क्यों होते हैं, और आपको कब टेस्ट करना चाहिए।
ज़्यादातर महिलाओं के लिए प्रेगनेंसी का सबसे पहला लक्षण यही होता है कि पीरियड तय तारीख़ पर नहीं आता। अगर आपका साइकल रेगुलर है और इस बार 7 से 10 दिन की देरी हो गई है, तो यह प्रेगनेंसी का एक मेजर सिम्पटम हो सकता है।
लेकिन यह समझना भी ज़रूरी है कि पीरियड मिस होने की और भी वजहें हो सकती हैं। स्ट्रेस, वज़न में अचानक बदलाव, थाइरॉइड की गड़बड़ी, या PCOS जैसी स्थितियों में भी पीरियड लेट हो सकता है। इसलिए सिर्फ़ पीरियड मिस होने से प्रेगनेंसी कन्फर्म नहीं मानी जा सकती। आपको टेस्ट ज़रूर करना चाहिए, जिसकी बात हम आगे करेंगे।
कई बार प्रेगनेंसी के लक्षण पीरियड की तारीख़ से पहले ही शुरू हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब एम्ब्रीओ (embryo) यूट्रस की दीवार से चिपकता है, तो शरीर के हॉर्मोन में बदलाव तेज़ी से होने लगते हैं। hCG हॉर्मोन बनना शुरू होता है, प्रोजेस्टेरॉन (progesterone) का लेवल बढ़ता है, और इन सबका असर आपके शरीर पर दिखने लगता है।
कुछ महिलाओं को इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (implantation bleeding) भी होती है। यह बहुत हल्की स्पॉटिंग होती है, पिंक या ब्राउन कलर की, जो 1 से 2 दिन रहती है। यह पीरियड नहीं है, बल्कि एम्ब्रीओ के यूट्रस से जुड़ने का संकेत है। हर महिला को यह नहीं होती, लेकिन अगर आपको पीरियड से कुछ दिन पहले बहुत हल्की स्पॉटिंग दिखे तो यह प्रेगनेंसी का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ़्तों में ब्रेस्ट में बदलाव बहुत कॉमन है। आपको लग सकता है कि ब्रेस्ट भारी हो गए हैं, छूने पर दर्द होता है, या निप्पल के आसपास का हिस्सा, जिसे एरिओला कहते हैं, गहरे रंग का हो गया है।
यह सब प्रोजेस्टेरॉन और एस्ट्रोजन (estrogen) के बढ़ने की वजह से होता है। ये हॉर्मोन ब्रेस्ट को आगे दूध बनाने के लिए तैयार करने लगते हैं। अगर यह फीलिंग बनी रहे और पीरियड न आए, तो प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ जाती है।
अगर आपको अचानक बहुत ज़्यादा थकान लगने लगी है, दिन में नींद आती है, और सुबह उठने के बाद भी ताज़गी नहीं लगती, तो यह प्रेगनेंसी का एक शुरुआती लक्षण हो सकता है।
इसकी मुख्य वजह प्रोजेस्टेरॉन है जो शुरुआती दिनों में तेज़ी से बढ़ता है। इसका सीधा असर शरीर की एनर्जी पर पड़ता है। यह थकान पहली तिमाही यानी फर्स्ट ट्राइमेस्टर (first trimester pregnancy) में सबसे ज़्यादा होती है, सेकंड ट्राइमेस्टर में थकान और नींद इतनी नहीं लगती और बेहतर लगने लगता है।
मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness) प्रेगनेंसी का सबसे जाना-माना लक्षण है, लेकिन इसका नाम थोड़ा भ्रामक है। यह सिर्फ़ सुबह नहीं, बल्कि दिन में कभी भी हो सकती है।
आमतौर पर जी मिचलाना 6वें हफ़्ते के आसपास शुरू होता है, लेकिन कुछ महिलाओं को 4 से 5 हफ़्ते में ही उल्टी जैसा लगने लगता है। इसकी वजह hCG हॉर्मोन का तेज़ी से बढ़ना है। जिन महिलाओं में hCG बहुत तेज़ी से बढ़ता है, उन्हें जी मिचलाना ज़्यादा होता है।
प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में पेट के निचले हिस्से में हल्की क्रैम्पिंग हो सकती है। यह बिल्कुल पीरियड आने से पहले जैसी feeling होती है, इसलिए बहुत-सी महिलाएँ समझती हैं कि पीरियड आने वाला है।
यह क्रैम्पिंग दो वजहों से होती है। पहली, इम्प्लांटेशन के दौरान जब एम्ब्रीओ यूट्रस की दीवार से जुड़ता है तो हल्का खिंचाव होता है। दूसरी, यूट्रस धीरे-धीरे फैलना शुरू करता है, और इसकी मसल्स में हल्की ऐंठन होती है।
अगर आपको लगातार पेशाब आने की ज़रूरत महसूस हो रही है, ख़ासकर रात में, तो यह भी प्रेगनेंसी का एक शुरुआती लक्षण हो सकता है।
प्रेगनेंसी शुरू होते ही शरीर में खून की मात्रा बढ़ने लगती है, किडनी को ज़्यादा काम करना पड़ता है, और पेशाब ज़्यादा बनता है। बढ़ता हुआ यूट्रस ब्लैडर (bladder) पर भी दबाव डालता है।
प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में अचानक मूड बदलना, बिना वजह रोना आना, या छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन होना आम है। कई महिलाएँ कहती हैं कि उन्हें ख़ुद समझ नहीं आता कि वो इतनी इमोशनल क्यों हो रही हैं।
इसकी वजह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन दोनों हैं जो तेज़ी से बदल रहे होते हैं और दिमाग़ में मूड कंट्रोल करने वाले हिस्सों को प्रभावित करते हैं। यह कोई कमज़ोरी नहीं है, शरीर का सामान्य रिस्पॉन्स है। अगर आप बहुत ज़्यादा उदास या बेचैन महसूस करें, तो डॉक्टर से बात करें।
प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ़्तों में ब्रेस्ट में बदलाव बहुत कॉमन है। आपको लग सकता है कि ब्रेस्ट भारी हो गए हैं, छूने पर दर्द होता है, या निप्पल के आसपास का हिस्सा, जिसे एरिओला कहते हैं, गहरे रंग का हो गया है।
यह सब प्रोजेस्टेरॉन और एस्ट्रोजन (estrogen) के बढ़ने की वजह से होता है। ये हॉर्मोन ब्रेस्ट को आगे दूध बनाने के लिए तैयार करने लगते हैं। अगर यह फीलिंग बनी रहे और पीरियड न आए, तो प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ जाती है।
अगर आपको अचानक बहुत ज़्यादा थकान लगने लगी है, दिन में नींद आती है, और सुबह उठने के बाद भी ताज़गी नहीं लगती, तो यह प्रेगनेंसी का एक शुरुआती लक्षण हो सकता है।
इसकी मुख्य वजह प्रोजेस्टेरॉन है जो शुरुआती दिनों में तेज़ी से बढ़ता है। इसका सीधा असर शरीर की एनर्जी पर पड़ता है। यह थकान पहली तिमाही यानी फर्स्ट ट्राइमेस्टर (first trimester pregnancy) में सबसे ज़्यादा होती है, सेकंड ट्राइमेस्टर में थकान और नींद इतनी नहीं लगती और बेहतर लगने लगता है।
मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness) प्रेगनेंसी का सबसे जाना-माना लक्षण है, लेकिन इसका नाम थोड़ा भ्रामक है। यह सिर्फ़ सुबह नहीं, बल्कि दिन में कभी भी हो सकती है।
आमतौर पर जी मिचलाना 6वें हफ़्ते के आसपास शुरू होता है, लेकिन कुछ महिलाओं को 4 से 5 हफ़्ते में ही उल्टी जैसा लगने लगता है। इसकी वजह hCG हॉर्मोन का तेज़ी से बढ़ना है। जिन महिलाओं में hCG बहुत तेज़ी से बढ़ता है, उन्हें जी मिचलाना ज़्यादा होता है।
इनके अलावा खाने की पसंद बदलना, किसी गंध से बेचैनी होना, कब्ज़ की शिकायत क्योंकि प्रोजेस्टेरॉन पाचन को धीमा करता है, सिरदर्द, और नाक बंद होना भी शुरुआती प्रेगनेंसी में हो सकता है।
हर महिला का अनुभव अलग होता है। कुछ को बहुत से लक्षण दिखते हैं, कुछ को बहुत कम। लक्षण कम होने का मतलब दिक़्क़त नहीं है।
प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण शरीर का अपना तरीक़ा है आपको बताने का कि अंदर कुछ नया शुरू हो रहा है। पीरियड मिस होना, ब्रेस्ट में बदलाव, थकान, जी मिचलाना, और मूड स्विंग्स जैसे लक्षण आम हैं, लेकिन इनमें से कोई भी अकेला लक्षण प्रेगनेंसी confirm नहीं करता। सबसे भरोसेमंद तरीक़ा है प्रेगनेंसी टेस्ट और उसके बाद डॉक्टर की जाँच। अगर आपको कोई भी लक्षण गंभीर लगे, ख़ासकर ब्लीडिंग या तेज़ दर्द, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।