कंसीव करने की कोशिश कर रही महिलाओं के लिए अपनी फर्टाइल विंडो जानने के लिए ओव्यूलेशन किट सबसे आसान और विश्वसनीय तरीका है। यह किट यूरिन में LH यानी ल्यूटिनाइज़िंग हार्मोन में हुयी बढ़त को पकड़ती है और ओवुलेशन का सही समय बताती है। लेकिन बहुत सी महिलाएँ किट ख़रीद तो लेती हैं पर सही तरीके से उसे यूज़ नहीं कर पातीं। गलत वक़्त पर टेस्ट करना, रिज़ल्ट ग़लत पढ़ना, या बहुत ज़्यादा पानी पीकर टेस्ट करना ये सब बहुत कॉमन गलतियाँ हैं, जो ज़्यादातर महिलायें करती हैं।
इस आर्टिकल में हम पढ़ेंगे Ovulation Kit kaise use kare in Hindi, उसका रिज़ल्ट कैसे पढ़ें, टाइमिंग कैलकुलेशन, और PCOS या अनियमित पीरियड में किट कैसे काम करती है।
ओव्यूलेशन किट को OPK यानी ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट (Ovulation Predictor Kit ) भी कहते हैं। यह यूरिन में LH हार्मोन का लेवल चेक करती है। सामान्यतः LH शरीर में कम मात्रा में रहता है। लेकिन ओव्यूलेशन से ठीक 24 से 48 घंटे पहले LH में अचानक तेज़ बढ़ोतरी होती है, इसे LH सर्ज कहते हैं। ओव्यूलेशन किट इसी सर्ज को डिटेक्ट करती है और बताती है कि अगले 1 से 2 दिन में एग रिलीज़ होने वाला है।
यह किट प्रेगनेंसी टेस्ट जैसी दिखती है लेकिन इसका काम अलग है। प्रेगनेंसी टेस्ट किट hCG हॉर्मोन चेक करती है, लेकिन ओव्यूलेशन किट LH हॉर्मोन चेक करती है।
सही वक़्त पर टेस्ट शुरू करना बहुत ज़रूरी है, वरना LH सर्ज मिस हो सकता है। टेस्ट अपनी मेंस्ट्रुअल साइकिल के हिसाब से करना चाहिए।
यह एक जनरल फ़ॉर्मूला है कि आप अपनी साइकिल की लंबाई में से 17 घटा दें। जो नंबर आए उस दिन से टेस्ट शुरू करें। जैसे 30 दिन की साइकिल है तो 30 में 17 घटाएं यानी 13, इसका मतलब है कि आप Day 13 से टेस्ट करें।
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अगर ओव्यूलेशन किट का रिजल्ट पॉज़िटिव आए, तो इसका मतलब है कि ओव्यूलेशन 24 से 48 घंटों में होगा। अगर आप माँ बनने का प्लान कर रही हैं तो इसी दिन और अगले दिन संबंध बनाएँ क्योंकि ये दोनों दिन सबसे ज्यादा फर्टाइल होते हैं। स्पर्म शरीर में 3 से 5 दिन तक ज़िंदा रह सकते हैं, इसलिए पॉज़िटिव रिजल्ट आने से 1 दिन पहले बनाये गये का शारीरिक संबंध की वजह से भी प्रेगनेंसी हो सकती है।
रिजल्ट पॉज़िटिव आने के बाद उस साइकिल के लिए किट यूज़ करना बंद कर सकते हैं । अगर इस साइकिल में कंसीव नहीं हुआ है तो अगली साइकिल में फिर से टेस्ट करें।
PCOS में ओव्यूलेशन किट पर हमेशा भरोसा नहीं किया जा सकता। PCOS में LH लेवल ज्यादातर बेसलाइन पर ही रहता है, जिससे किट बार-बार फ़ॉल्स पॉज़िटिव दे सकती है।
अनियमित पीरियड में ओव्यूलेशन कब होगा बता पाना मुश्किल होता है। आपको बहुत ज़्यादा स्ट्रिप्स यूज़ करनी पड़ सकती हैं। ऐसे केस में डिजिटल ओव्यूलेशन किट बेहतर विकल्प है जो स्पष्ट हाँ/नहीं परिणाम देती है। या फिर फर्टिलिटी क्लिनिक में फॉलिकुलर मॉनिटरिंग वाला अल्ट्रासाउंड कराएँ। ओवुलेशन के लिए फर्टाइल विंडो जानने का यह सबसे सटीक तरीका है।
IUI ट्रीटमेंट में ओव्यूलेशन किट काफ़ी उपयोगी होती है। डॉक्टर कभी-कभी मरीज़ को घर पर किट से टेस्ट करने को कहते हैं और पॉज़िटिव आने पर IUI प्रोसीजर निर्धारित करते हैं।
IVF में ओव्यूलेशन किट कम इस्तेमाल होता है क्योंकि ओव्यूलेशन को दवाइयों से कंट्रोल किया जाता है और फॉलिकुलर मॉनिटरिंग अल्ट्रासाउंड से होती है। लेकिन नेचुरल साइकिल IVF में डॉक्टर ओव्यूलेशन किट यूज़ करा सकते हैं। ट्रिगर इंजेक्शन यानी hCG इंजेक्शन देने के बाद ओव्यूलेशन किट पॉज़िटिव रिजल्ट दिखा सकती है, यह फ़ॉल्स पॉज़िटिव होता है क्योंकि hCG हॉर्मोन और LH हॉर्मोन में लगभग एक से होते हैं।
Ovulation kit कंसीव करने की कोशिश में एक आसान और उपयोगी तरीका है, जिससे आप ओव्यूलेशन का सही समय पहचान सकती हैं। इसे सही तरीके से इस्तेमाल कर और रिज़ल्ट को सही तरह समझ कर आप सही समय पर प्रेगनेंसी के लिए प्रयास कर सकती हैं।
अगर पीरियड बहुत अनियमित हैं या PCOS की समस्या है, तो केवल किट पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह से फॉलिकुलर मॉनिटरिंग करवाना ज्यादा सही रहता है।