सारांश (Overview)
एंडोमेट्रियोसिस और PCOS, दोनों महिलाओं में पाई जाने वाली कॉमन समस्याएं हैं और दोनों का असर कंसीव करने पर पड़ सकता है।
लेकिन दोनों एक जैसी समस्याएं नहीं हैं। PCOS में हार्मोन और ओव्यूलेशन से जुड़ी दिक्कत होती है, जिसकी वजह से एग समय पर नहीं बनता या रिलीज नहीं हो पाता। एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिश्यू गर्भाशय के बाहर भी बनने लगता है, जिससे दर्द, सूजन और चिपकाव हो सकता है।
आगे जानेंगे कि पीरियड का पैटर्न दोनों के बीच अंतर समझने में कैसे मदद करता है, इनकी जांच का तरीका अलग क्यों है, फर्टिलिटी पर असर किस तरह अलग पड़ता है और क्या दोनों एक साथ भी हो सकते हैं।
एंडोमेट्रियोसिस | PCOS | |
मुख्य समस्या | गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिश्यू बाहर बनना | हार्मोन और ओव्यूलेशन की गड़बड़ी |
पीरियड | अक्सर समय पर | अनियमित या देर से |
मुख्य लक्षण | तेज पीरियड दर्द, पेल्विक दर्द, संबंध के दौरान दर्द | अनियमित पीरियड, मुहांसे, चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल |
फर्टिलिटी पर असर | सूजन और एडहेसिव की वजह से कंसीव करने में दिक्कत | एग समय पर रिलीज न होने से कंसीव करने में दिक्कत |
जांच | लक्षणों के पैटर्न के साथ अल्ट्रासाउंड या MRI | पीरियड, हार्मोन और जरूरत के हिसाब से अल्ट्रासाउंड |
यानी एंडोमेट्रियोसिस में दर्द और टिश्यू की गलत जगह मौजूदगी ज्यादा अहम होती है, जबकि PCOS में मुख्य सवाल यह होता है कि ओव्यूलेशन ठीक से हो रहा है या नहीं।
पीरियड का पैटर्न Endometriosis vs PCOS के बीच शुरुआती अंतर समझने में मदद कर सकता है। अगर पीरियड बार-बार लेट होते हैं या कई महीनों तक नहीं आते, तो PCOS की संभावना देखी जाती है। वहीं, पीरियड समय पर आते हैं लेकिन हर महीने बहुत तेज दर्द होता है, तो एंडोमेट्रियोसिस के बारे में सोचना चाहिए।
ऐसा इसलिए क्योंकि PCOS में ओव्यूलेशन रेगुलर नहीं हो पाता। एंडोमेट्रियोसिस में ओव्यूलेशन की यह समस्या जरूरी नहीं होती, इसलिए पीरियड समय पर आते रह सकते हैं, लेकिन दर्द भी बना रह सकता है।
यह सिर्फ एक साइन है, पक्का नियम नहीं। इसलिए डॉक्टर को यह बताना जरूरी है कि पीरियड कितने दिन में आते हैं और दर्द कब और कितना होता है। इससे आगे की जांच तय करने में मदद मिलती है।
लक्षण | एंडोमेट्रियोसिस | PCOS |
|---|---|---|
पीरियड | ज्यादातर समय पर | अनियमित, देर से या महीनों गायब |
पीरियड का दर्द | बहुत तेज, अक्सर दवा से भी काबू नहीं | आमतौर पर खास नहीं |
दर्द का समय | मेंस्ट्रुअल साइकिल के साथ लौटता है | कोई तय पैटर्न नहीं |
चेहरे और शरीर पर बाल | इससे संबंध नहीं | बढ़ सकते हैं |
मुहांसे और तैलीय त्वचा | इससे संबंध नहीं | कॉमन है |
वजन | इससे संबंध नहीं | बढ़ सकता है |
संबंध के दौरान गहरा दर्द | आमतौर पर नहीं होता | |
पेट साफ होते समय या पेशाब में दर्द | पीरियड के दिनों में हो सकता है | नहीं |
थकान | कॉमन है | हो सकती है |
PCOS की पहचान के लिए कोई एक टेस्ट नहीं होता। आमतौर पर तीन में से दो चीजें देखी जाती हैं:
वयस्क महिलाओं में AMH को भी पॉलीसिस्टिक ओवरी देखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक बात यहां समझना जरूरी है। अगर पीरियड अनियमित हैं और एंड्रोजन भी बढ़ा हुआ है, तो PCOS की पहचान के लिए अंडाशय का अल्ट्रासाउंड जरूरी नहीं रहता। यानी हर महिला को PCOS पता करने के लिए अल्ट्रासाउंड कराने की जरूरत नहीं होती।
इसी तरह, सिर्फ AMH बढ़ा हुआ आने से PCOS नहीं कहा जाता। इसे दूसरी रिपोर्ट और लक्षणों के साथ देखकर ही फैसला किया जाता है।
दुनिया भर में करीब 10 से 13 प्रतिशत महिलाओं में PCOS पाया जाता है, इसलिए यह कोई दुर्लभ कंडीशन नहीं है।
एंडोमेट्रियोसिस की जांच में आमतौर पर अल्ट्रासाउंड या MRI की मदद ली जाती है। हर महिला में लैप्रोस्कोपी की जरूरत नहीं होती। अगर स्कैन में कुछ नहीं मिलता या शुरुआती इलाज से आराम नहीं मिलता, तब डॉक्टर लैप्रोस्कोपी के बारे में सोच सकते हैं।
लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है। अल्ट्रासाउंड या MRI नॉर्मल आने का मतलब यह नहीं है कि एंडोमेट्रियोसिस नहीं है। खासकर सतही एंडोमेट्रियोसिस स्कैन में दिखाई नहीं दे सकता। इसलिए अगर पीरियड के साथ बहुत तेज दर्द या दूसरे लक्षण बने हुए हैं, तो सिर्फ नॉर्मल रिपोर्ट देखकर बात खत्म नहीं की जाती।
यानी एंडोमेट्रियोसिस की पहचान सिर्फ रिपोर्ट देखकर नहीं होती। आपके लक्षण कब और किस तरह होते हैं, उन्हें भी साथ में देखना जरूरी है।
यह करीब 2 से 10 प्रतिशत महिलाओं में पाया जाता है, पर इनफर्टिलिटी वाली महिलाओं में यह 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यही डाटा बताता है कि कंसीव न होने की जांच में इसे क्यों गंभीरता से देखा जाता है।
दोनों में कंसीव करने में दिक्कत हो सकती है, लेकिन फर्टिलिटी पर इसका असर एक जैसा नहीं होता।
PCOS में अगर ओव्यूलेशन नियमित नहीं हो रहा है, तो पहले दवा से ओव्यूलेशन कराने की कोशिश की जाती है। कई महिलाओं को इससे कंसीव करने में मदद मिलती है।
एंडोमेट्रियोसिस में इलाज तय करते समय सिर्फ लक्षण नहीं, उम्र, कितने समय से कंसीव करने की कोशिश चल रही है और बीमारी का फर्टिलिटी पर कितना असर है, इन सबको देखा जाता है। जरूरत पड़ने पर IVF जैसे ART विकल्प भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
एंडोमेट्रियोसिस | PCOS | |
|---|---|---|
इलाज का फोकस | दर्द और बीमारी के असर को कंट्रोल करना | ओव्यूलेशन रेगुलर कराना |
दवाएं | दर्द और हार्मोन को कंट्रोल करने वाली दवाएं | ओव्यूलेशन कराने वाली दवा |
सर्जरी | कुछ मामलों में जरूरत पड़ सकती है | आमतौर पर जरूरत नहीं पड़ती |
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट | उम्र, लक्षण और फर्टिलिटी को देखकर फैसला | ओव्यूलेशन की दवा से शुरुआत हो सकती है |
दोनों में इलाज का तरीका एक जैसा नहीं होता। कौन-सा इलाज करना है, यह सिर्फ बीमारी के नाम से नहीं, बल्कि आपके लक्षण और कंसीव करने की योजना देखकर तय किया जाता है।
हां, दोनों एक साथ हो सकते हैं। PCOS होने का मतलब यह नहीं है कि एंडोमेट्रियोसिस नहीं हो सकता।
कई बार PCOS की वजह से पीरियड इतने अनियमित होते हैं कि एंडोमेट्रियोसिस का दर्द साफ तौर पर समझ नहीं आता। लेकिन अगर PCOS का इलाज शुरू होने के बाद पीरियड नियमित हो गए हैं और हर महीने तेज दर्द होने लगा है, तो इसे सिर्फ पीरियड का दर्द मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में एंडोमेट्रियोसिस की भी जांच करनी पड़ सकती है।
यह कन्फ्यूजन बहुत आम है, खासकर जब PCOD और PCOS को एक ही चीज की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
PCOS एक हार्मोन और ओव्यूलेशन से जुड़ी कंडीशन है। PCOD शब्द का इस्तेमाल भी इसी तरह की समस्या के लिए किया जाता है, लेकिन आज मेडिकल गाइडलाइन में PCOS नाम ज्यादा इस्तेमाल होता है। एंडोमेट्रियोसिस इससे अलग समस्या है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिश्यू गर्भाशय के बाहर बनने लगता है।
इसलिए PCOD और PCOS को लेकर नाम का कन्फ्यूजन हो सकता है, लेकिन एंडोमेट्रियोसिस को इन दोनों के साथ एक ही समस्या नहीं समझना चाहिए।
अगर आप PCOS और एंडोमेट्रियोसिस के बीच कन्फ्यूज हैं, तो सबसे पहले अपने पीरियड का पैटर्न देखें। पीरियड बार-बार लेट होते हैं या कई महीनों तक नहीं आते, तो कहीं यह PCOS की वजह से नहीं हो रहा, यह देखना जरूरी है। वहीं, अगर पीरियड समय पर आते हैं लेकिन हर महीने बहुत तेज दर्द होता है, तो एंडोमेट्रियोसिस की जांच के बारे में डॉक्टर से बात करें।
एक बात और ध्यान रखें। अल्ट्रासाउंड नॉर्मल आने का मतलब यह नहीं है कि एंडोमेट्रियोसिस नहीं है। अगर दर्द लगातार बना हुआ है, तो सिर्फ नॉर्मल रिपोर्ट देखकर इसे नजरअंदाज न करें।
और अगर आपको पहले से PCOS है, तो हर लक्षण को उसी की वजह न मानें। PCOS और एंडोमेट्रियोसिस दोनों एक साथ भी हो सकते हैं। सही वजह पता चलेगी, तभी सही इलाज चुना जा सकेगा।