प्रेगनेंसी न होने पर अक्सर सारा दोष महिला को ही दिया जाता है, जबकि इसके लिए दोनों पार्टनर जिम्मेदार होते हैं और दिक्कत दोनों में से किसी में भी हो सकती है। फिर भी, female infertility को समझना ज़रूरी है क्योंकि प्रेगनेंसी के लिए महिला के शरीर में ओव्यूलेशन से लेकर इम्प्लांटेशन तक कई स्टेप्स सही होने चाहिए।
Female infertility एक कॉम्प्लेक्स समस्या है जिसमें हॉर्मोन, एनाटॉमी, और लाइफस्टाइल सभी का रोल होता है। इस लेख female infertility in Hindi में जानेंगे कि महिलाओं में इनफर्टिलिटी की वजहें क्या हैं, डायग्नोसिस कैसे होता है। साथ ही यह भी समझेंगे कि कुछ साधारण लाइफस्टाइल बदलाव भी female infertility में कितना असर डाल सकते हैं।
जब कोई महिला रेगुलर अनप्रोटेक्टेड रिलेशन के बावजूद 12 महीने तक कंसीव न कर पाए, और जांच में कारण महिला की तरफ से आए, तो इसे female infertility कहते हैं। 35 से ज़्यादा उम्र में यह समय सीमा 6 महीने मानी जाती है।
प्रेगनेंसी के लिए कई चीज़ें एक साथ सही होनी चाहिए। ओवरी से एग बनना और समय पर रिलीज़ होना, फैलोपियन ट्यूब का खुला होना ताकि एग और स्पर्म मिल सकें, और यूट्रस की लाइनिंग इतनी तैयार हो कि एम्ब्रीओ इम्प्लांट हो सके। इनमें से किसी भी स्टेप में दिक्कत आए तो female infertility हो सकती है।
Female infertility के कारण कई हो सकते हैं और अक्सर एक से ज़्यादा फैक्टर एक साथ काम करते हैं।
PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम सबसे आम कारण है। इसमें ओवरी में छोटे छोटे सिस्ट बनते हैं और ओव्यूलेशन (ovulation) रेगुलर नहीं होता। पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं, वज़न बढ़ सकता है, और चेहरे पर अनचाहे बाल आ सकते हैं।
एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) दूसरा बड़ा कारण है। इसमें यूट्रस की लाइनिंग का टिश्यू यूट्रस के बाहर बढ़ने लगता है, जिससे ओवरी या ट्यूब प्रभावित हो सकती हैं। इसकी वजह से पीरियड्स में बहुत तेज़ दर्द होता है।
थाइरॉइड की गड़बड़ी, प्रोलैक्टिन (prolactin) का हाई लेवल, और POI यानी प्रीमैच्योर ओवेरियन इन्सफिशिएंसी (premature ovarian insufficiency) भी female infertility की वजह बनते हैं।
Female infertility के करीब 25 से 30 प्रतिशत मामलों में ओव्यूलेशन सही से नहीं हो पाता। अगर ओवरी से एग ही नहीं निकल रहा, तो फर्टिलाइज़ेशन (fertilization) का सवाल ही नहीं उठता।
PCOS में हॉर्मोन का बैलेंस बिगड़ जाता है, जिससे एग तैयार तो होता है लेकिन ओवरी से बाहर नहीं आ पाता।
हाइपोथैलेमिक डिसफंक्शन (hypothalamic dysfunction) में ब्रेन से सही सिग्नल नहीं आता जिससे FSH और LH हॉर्मोन सही मात्रा में रिलीज़ नहीं होते। बहुत कम वज़न, बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़, या तेज़ स्ट्रेस इसकी वजह बन सकते हैं।
POI यानी प्रीमैच्योर ओवेरियन इन्सफिशिएंसी female infertility का एक और महत्वपूर्ण कारण है। इसमें 40 से कम उम्र में महिला के ओवरी का काम करना बंद हो जाता है।
मेनोपॉज़ के विपरीत, जहां धीरे धीरे ओव्यूलेशन कम होता है, POI में अचानक एग निकलना बंद हो सकता है।
महिला को अभी महीनों या सालों का ओव्यूलेशन बाकी हो सकता है, लेकिन प्रिडिक्टेबल नहीं होता।
POI को समझना और सही समय पर इलाज करवाना female infertility का समाधान के लिए बेहद ज़रूरी है।
अच्छी बात यह है कि ओव्यूलेशन की ज़्यादातर समस्याएं दवाओं से ठीक हो जाती हैं।
फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज female infertility का एक और बड़ा कारण है। ट्यूब में अगर इन्फेक्शन, सर्जरी, या एंडोमेट्रियोसिस की वजह से ब्लॉकेज हो जाए, तो स्पर्म और एग मिल ही नहीं पाते।
पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिज़ीज़ (pelvic inflammatory disease) यानी PID सबसे कॉमन कारण है जिससे ट्यूब ब्लॉक होती हैं।
यूट्रस की तरफ से फाइब्रॉइड (fibroid), पॉलिप (polyp), या यूटेराइन सेप्टम (uterine septum) जैसी समस्याएं भी प्रेगनेंसी को मुश्किल बना सकती हैं। ये समस्याएं एम्ब्रीओ के इम्प्लांटेशन (implantation) में बाधा टी’ डालती हैं।
Female infertility treatment इसके कारणों के अनुसार प्लान किया जाता है। ओव्यूलेशन की समस्या में दवाओं से इलाज शुरू होता है। क्लोमिफीन (clomiphene) या लेट्रोज़ोल (letrozole) से ओव्यूलेशन रेगुलर कराया जाता है।
ट्यूब ब्लॉकेज या यूट्रस की समस्या में सर्जरी से इलाज होता है। लैप्रोस्कोपी से एंडोमेट्रियोसिस, सिस्ट, या ट्यूब की दिक्कत ठीक की जा सकती है।
अगर दवाओं और सर्जरी से रिज़ल्ट न आए, या दोनों ट्यूब बंद हों, तो IUI या IVF की ज़रूरत पड़ती है।
IVF ख़ासतौर पर तब फ़ायदेमंद है जब उम्र ज़्यादा हो, ओवेरियन रिज़र्व कम हो, या कई ट्रीटमेंट फेल हो चुके हों।
PCOS वाली महिलाओं में लाइफस्टाइल में बदलाव भी बहुत असरदार है। 5 से 10 प्रतिशत वज़न कम करने से भी ओव्यूलेशन में सुधार हो सकता है।
Female infertility सिर्फ डॉक्टर की दवा से ठीक नहीं होती,इसके लिये लाइफस्टाइल को भी बदलना होता है। ज़्यादा या कम वज़न दोनों ही female infertility बढ़ा सकते हैं। ओवरी को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित BMI ज़रूरी है। 5 से 10 प्रतिशत वज़न कम करने से ही फर्टिलिटी में सुधार हो सकता है।
आपकी डाइट में एंटीऑक्सिडेंट्स (antioxidants) से भरपूर चीज़ें, हरी सब्ज़ियां, दालें होनी चाहिये। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड खाना कम करें। ट्रांस फैट और अत्यधिक शुगर से दूर रहना चाहिए क्योंकि ये हॉर्मोन बैलेंस को बिगाड़ते हैं।
स्ट्रेस और नींद भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। कम नींद से कोर्टिसोल (cortisol) हॉर्मोन बढ़ता है जो रिप्रोडक्टिव हॉर्मोन (reproductive hormones) पर ख़राब असर पड़ता है।
योग, मेडिटेशन, और नियमित व्यायाम से स्ट्रेस कम होता है और रिप्रोडक्टिव हैल्थ (reproductive health) के लिए अच्छे होते हैं।
स्मोकिंग और अल्कोहल female infertility के सबसे बड़े कारण हैं। स्मोकिंग से एग की क्वालिटी ख़राब होती है, ओव्यूलेशन प्रभावित होता है, और मिसकैरेज़ का रिस्क बढ़ता है। अगर आप प्रेगनेंसी की कोशिश कर रही हैं तो आपको स्मोकिंग छोड़ देनी चाहिए।
Female infertility के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन आज के ट्रीटमेंट विकल्प इतने एडवांस हैं कि ज़्यादातर समस्याओं का समाधान संभव है। सबसे पहले सही जांच ज़रूरी है ताकि कारण पता चले। उसके बाद आपके डॉक्टर आपकी उम्र, रिपोर्ट्स, और कंडीशन के हिसाब से दवाई, सर्जरी, IUI, या IVF में से आपके लिए ट्रीटमेंट प्लान करेंगे।