जब अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में "hemorrhagic ovarian cyst" लिखा आता है, तो पहली बात जो दिमाग़ में आती है वो यह है कि ओवरी में खून क्यों है और कहीं यह कोई बड़ी बीमारी तो नहीं। लेकिन अगर आपकी रिपोर्ट में यह लिखा है, तो पहले यह जानना ज़रूरी है कि ज़्यादातर मामलों में यह सिस्ट अपने आप ठीक हो जाती है।
इस आर्टिकल में आप समझेंगे कि हेमरेजिक ओवेरियन सिस्ट (hemorrhagic ovarian cyst) बनती कैसे है, इसमें खून क्यों आता है, यह कब ख़तरनाक हो सकती है, और आपको डॉक्टर से क्या पूछना चाहिए।
आपकी ओवरी (ovary) में हर महीने एक फॉलिकल (follicle) बढ़ता है जिसके अंदर एग होता है। जब यह फॉलिकल पूरा बड़ा हो जाता है, तो यह फटता है और एग बाहर निकलता है, इसी को ओव्यूलेशन (ovulation) कहते हैं। कभी-कभी यह फॉलिकल फटता नहीं और बढ़ता रहता है, जिससे एक तरल पदार्थ भरी थैली बन जाती है। इसे ही सिस्ट कहते हैं।
ओवरी में सिस्ट बनना बहुत कॉमन है। ज़्यादातर सिस्ट फ़ंक्शनल (functional) होती हैं, यानी मासिक चक्र के हिस्से के तौर पर बनती हैं और 1 से 3 साइकल में ख़ुद ग़ायब हो जाती हैं।
सामान्य फ़ंक्शनल सिस्ट में साफ़ फ्लूइड भरा होता है। लेकिन हेमरेजिक सिस्ट में खून भी मिला होता है। "हेमरेजिक" का मतलब ही है खून से जुड़ा हुआ। जब सिस्ट की दीवार में मौजूद छोटी खून की नलियाँ टूट जाती हैं, तो खून सिस्ट के अंदर आ जाता है। अल्ट्रासाउंड पर यह दिखने में बाक़ी सिस्ट से थोड़ी अलग लगती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह ख़तरनाक है।
यह समझना ज़रूरी है कि हेमरेजिक सिस्ट भी एक फ़ंक्शनल सिस्ट है। यह कैंसर नहीं है और न ही यह कैंसर बनती है। बस इसमें खून होता है जो अल्ट्रासाउंड पर थोड़ा चिंता में डाल देने वाला लग सकता है।
इसे समझने के लिए ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को थोड़ा गहराई से देखना होगा। जब ओवरी में फॉलिकल बढ़ रहा होता है, तो उसकी दीवार में छोटी-छोटी खून की नलियाँ होती हैं जो उसे पोषण देती हैं। कभी-कभी ओव्यूलेशन के दौरान या ठीक बाद ये नलियाँ टूट जाती हैं और खून फॉलिकल या नई बनी सिस्ट के अंदर चला जाता है।
इसके अलावा एक और तरीक़ा है जिससे यह सिस्ट बनती है। ओव्यूलेशन के बाद जो कॉर्पस ल्यूटियम (corpus luteum) बनता है, उसमें भी कभी-कभी ब्लीडिंग हो जाती है। इसे कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट (corpus luteum cyst) कहते हैं और अगर इसमें खून भर जाए तो यह भी हेमरेजिक सिस्ट ही कहलाती है। लेकिन अल्ट्रासाउंड पर तभी दिखती है जब सिस्ट के अंदर खून की मात्रा थोड़ी ज़्यादा हो।
बहुत-सी महिलाओं को हेमरेजिक सिस्ट का पता तभी चलता है जब कोई और वजह से अल्ट्रासाउंड होता है। यानी यह बिना किसी लक्षण के भी हो सकती है।
लेकिन कुछ महिलाओं को लक्षण दिख सकते हैं। पेट के एक तरफ़ (जिस ओवरी में सिस्ट है उस तरफ़) हल्का से मध्यम दर्द हो सकता है। यह दर्द अचानक शुरू होता है और कुछ घंटों या दिनों में कम होने लगता है। कभी-कभी पेट में भारीपन या फुलावट महसूस होती है। अगर सिस्ट थोड़ी बड़ी है (5 सेंटीमीटर से ज़्यादा), तो दर्द ज़्यादा हो सकता है। पीरियड अनियमित हो सकता है या सामान्य से थोड़ा अलग हो सकता है।
ध्यान रखें कि ओव्यूलेशन के दौरान भी एक तरफ़ हल्का दर्द होता है जिसे मिट्टलश्मर्ज़ (mittelschmerz) कहते हैं। कभी-कभी यह और हेमरेजिक सिस्ट का दर्द एक जैसा लगता है।
कुछ महिलाओं को इंटरकोर्स के दौरान भी दर्द हो सकता है, ख़ासकर अगर सिस्ट बड़ी है। यह दर्द सिस्ट पर दबाव पड़ने की वजह से होता है। अगर आपको लगातार ऐसा दर्द हो रहा है तो डॉक्टर को ज़रूर बताएँ।
अगर आपकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में हेमरेजिक सिस्ट आया है, तो उसमें कुछ शब्द दिख सकते हैं जो आपको भ्रमित कर सकते हैं। "internal echoes", "reticular pattern", "cobweb appearance", या "complex cyst" खून की वजह से दिखने वाले पैटर्न हैं।
ताज़ा खून अल्ट्रासाउंड पर अलग दिखता है और पुराना यानी जमा हुआ खून अलग। जैसे-जैसे खून पुराना होता है, उसका पैटर्न बदलता जाता है। इसी वजह से कभी-कभी हेमरेजिक सिस्ट देखने में ऐसी लग सकती है जैसे कोई सॉलिड चीज़ हो। लेकिन एक अनुभवी डॉक्टर इसे आसानी से पहचान लेता है। अगर कोई कन्फ्यूज़न हो, तो डॉक्टर 4 से 6 हफ़्ते बाद दोबारा अल्ट्रासाउंड करवाते हैं।
अगर हेमरेजिक सिस्ट होगी तो इस समय तक साइज़ में कम हो जाती है या ग़ायब हो जाती है, जबकि कोई ठोस गांठ वैसी की वैसी रहती है।
कुछ कंडीशन ऐसी हैं जिनमें हेमरेजिक सिस्ट को गंभीरता से लेना चाहिए। अगर सिस्ट बहुत बड़ी यानी 8 से 10 सेंटीमीटर से ज़्यादा है, तो ओवेरियन टॉर्शन (ovarian torsion) का ख़तरा बढ़ जाता है। टॉर्शन में ओवरी अपनी जगह से मुड़ जाती है और उसकी खून की सप्लाई बंद हो जाती है। इस कंडीशन में बहुत तेज़ और अचानक दर्द पैदा होता है जिसमें तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट ज़रूरी है।
अगर सिस्ट फट जाए (rupture) तो पेट में अचानक तेज़ दर्द होता है। हेमरेजिक सिस्ट फटने पर खून पेल्विस में आ सकता है। ज़्यादातर मामलों में यह खून थोड़ा होता है और शरीर सोख लेता है, लेकिन कभी-कभी ब्लीडिंग ज़्यादा हो सकती है जिसमें हॉस्पिटल में ऑब्जरवेशन या सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
हेमरेजिक ओवेरियन सिस्ट आमतौर पर फर्टिलिटी को नुकसान नहीं पहुँचाती। यह एक फ़ंक्शनल सिस्ट है जो ओवरी के सामान्य काम का हिस्सा है।
जब तक सिस्ट मौजूद है, उस ओवरी से उस साइकल में ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है। लेकिन दूसरी ओवरी काम करती रहती है, और अगले साइकल तक यह ओवरी भी ठीक हो जाती है।
सर्जरी तभी फर्टिलिटी पर असर डाल सकती है जब बार-बार सिस्ट निकालनी पड़े और ओवरी के हेल्दी टिश्यू कम हो जाए। इसीलिए डॉक्टर पहले वेट एंड वाच (wait-and-watch) करते हैं और सर्जरी तभी करते हैं जब सच में ज़रूरत हो।
अगर आप IVF या IUI की ट्रीटमेंट करवा रही हैं और बेसलाइन स्कैन यानी साइकल के दूसरे या तीसरे दिन के अल्ट्रासाउंड में हेमरेजिक सिस्ट दिखे, तो डॉक्टर अमूमन एक साइकल तक इंतज़ार करते हैं ताकि सिस्ट ख़ुद ठीक हो जाए।
कुछ मामलों में अगर सिस्ट छोटी है यानी 3 सेंटीमीटर से कम है और हॉर्मोन लेवल सही हैं, तो डॉक्टर उसी साइकल में ट्रीटमेंट शुरू कर देते हैं। यह फ़ैसला आपकी उम्र, ओवेरियन रिज़र्व, और बाक़ी स्थिति को देखते हुए किया जाता है।
IVF स्टिमुलेशन के दौरान भी कभी-कभी एक या दो फॉलिकल में ब्लीडिंग हो सकती है। यह गंभीर नहीं होता और एग रिट्रीवल (egg retrieval) के बाद ठीक हो जाता है।
cसा हो रहा है, तो डॉक्टर ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (oral contraceptive pills) दे सकते हैं। ये पिल्स ओव्यूलेशन को रोकती हैं, जिससे नई सिस्ट बनने की संभावना कम हो जाती है। यह ट्रीटमेंट सिर्फ़ तब दिया जाता है जब आप फ़िलहाल प्रेगनेंसी प्लान नहीं कर रही हों।
अगर आप कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं, तो डॉक्टर दूसरे तरीक़ों जैसे ओव्यूलेशन इंडक्शन की दवाइयाँ बदलना या स्टिमुलेशन प्रोटोकॉल एडजस्ट करना इत्यादि से मैनेज करते हैं, ।
ज़्यादातर हेमरेजिक सिस्ट का ट्रीटमेंट ‘वेट एंड वाच’ ही है। अगर आपको है तो डॉक्टर दर्द के लिए दवाई देते हैं और फ़ॉलो-अप अल्ट्रासाउंड करते हैं। अगर सिस्ट 2 से 3 साइकल में ख़ुद ठीक हो जाए, तो कुछ और करने की ज़रूरत नहीं।
सर्जरी तब ज़रूरी होती है जब सिस्ट बहुत बड़ी हो और कम न हो रही हो, 1-2 साइकल के बाद भी अल्ट्रासाउंड में पैटर्न बदला हुआ नहीं दिखे और ठोस गांठ जैसा दिखता रहे, या टॉर्शन या ज़्यादा ब्लीडिंग जैसी इमरजेंसी हो। सर्जरी आमतौर पर लैप्रोस्कोपी (laparoscopy) से होती है जिसमें छोटे कट लगाकर सिस्ट निकाली जाती है। कोशिश यही रहती है कि ओवरी का हेल्दी हिस्सा बचाया जाए।
hemorrhagic ovarian cyst सुनने में डरावना लग सकता है, लेकिन यह ओवरी की एक आम फ़ंक्शनल स्थिति है जो मेंस्ट्रुअल साइकल के दौरान बन सकती है। ज़्यादातर मामलों में यह 1 से 3 साइकल में अपने आप ठीक हो जाती है और शरीर अंदर भरे खून को सोख लेता है।
फर्टिलिटी पर हेमरेजिक सिस्ट का कोई लंबे समय तक का असर नहीं होता। अपनी रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाएँ, फ़ॉलो-अप अल्ट्रासाउंड करवाएँ।
अगर कभी अचानक तेज़ पेट दर्द, चक्कर, या बेहोशी जैसा लगे तो तुरंत इमरजेंसी में जाएँ। सबसे ज़रूरी बात यह है कि इंटरनेट पर पढ़कर घबराने की बजाय अपने डॉक्टर से बात करें, क्योंकि वो आपकी पूरी स्थिति देखकर सही सलाह दे सकते हैं।