फैलोपियन ट्यूब दो पतली नलियां होती हैं जो अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती हैं। हर माहवारी चक्र में जब एक परिपक्व अंडा अंडाशय से निकलता है , और ट्यूब में आता है इस दौरान संबंध बनाने पर स्पर्म अण्डे को फर्टिलाइज कर देता है तो वही ट्यूब उसे फर्टिलाइजेशन के बाद गर्भाशय की ओर ले जाती है।
प्रेग्नेंसी में फेलोपियन ट्यूब का काम:
ऽ अण्डाशय से अण्डे को आगे बढ़ाना
ऽ स्पर्म और एग के मिलन यानि फर्टिलाईजेशन का स्थान
ऽ फर्टिलाइज्ड एग (ज़ाइगोट/एम्ब्रियो) को गर्भाशय तक पहुंचाना
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प्रक्रिया |
क्या होता है |
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Ovulation |
अंडाशय से परिपक्व (मैच्योर) अंडा बाहर निकलता है |
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Fertilization |
ओव्युलेशन के समय फैलोपियन ट्यूब के अंदर अंडा और स्पर्म मिलने पर फर्टिलाईजेशन होता है |
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Implantation |
फर्टिलाइजेशन से बना भ्रूण (एम्ब्रियो) गर्भाशय की दीवार में चिपकता है |
प्राकृतिक गर्भधारण बिना हेल्दी फैलोपियन ट्यूब के संभव नहीं हो सकता।
जब फैलोपियन ट्यूब में सूजन, (संक्रमण) इंफेक्शन, चिपक जाए या तरल पदार्थ भर जाने के कारण मार्ग आंशिक या पूरी तरह बंद हो जाता है, तो उसे फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज कहा जाता है। ब्लाॅकेज या अन्य किसी कारण से ट्यूब में रूकावट होने पर अण्डे के आगे बढ़ने या स्पर्म के इसके पास पहुंचने में समस्या हो सकती है। यह निःसंतानता का सबसे आम कारण है।
ब्लॉकेज के प्रकार
इस तरह की स्थिति में फैलोपियन ट्यूब (नली) पूरी तरह बंद नहीं होती,ट्यूब का मार्ग संकरा या कुछ भाग ब्लॉक होता है।इन मामलों में कभी - कभी नेचुरल प्रेगनेंसी के चांसेज होते हैं लेकिन रिस्क और समस्याएं बढ़ सकती हैं।
फैेलोपियन ट्यूब (नली) पूरी तरह बंद हो जाती है,इस कारण स्पर्म और एग का मिलना असंभव हो जाता है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण के चांसेज समाप्त हो जाते हैं।
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स्थिति |
प्रेग्नेंसी पर असर |
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एक ट्यूब ब्लॉक |
एक ट्यूब बंद होने पर, लेकिन दूसरी के सही तरीके से काम करने पर नेचुरल प्रेगनेंसी संभव है |
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दोनों ट्यूब ब्लॉक |
अगर दोनों ट्यूब ब्लाॅक हैं तो प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना बहुत कम होती है इस स्थिति में आईवीएफ जैसे असिस्टेड रिप्रोडक्टिव उपचारों की आवश्यकता हो सकती है। |
यदि ट्यूब में रुकावट यानी ब्लॉकेज है तो स्पर्म और अण्डा मिल नहीं पाएगा जिस कारण निषेचन नहीं होगा और निःसंतानता की समस्या होगी। प्राकृतिक गर्भधारण के लिए ट्यूब का खुला होना आवश्यक है।
फैलोपियन ट्यूब ब्लाॅक होने के कारण बाहर से दिखाई नहीं देते हैं लेकिन इसके परिणाम गर्भधारण को प्रभावित करते हैं । ट्यूबल ब्लॉकेज के कारणों की बात करें तो पेल्विक बीमारियां, संक्रमण और किसी तरह की सर्जरी के बाद चिपकाव ट्यूब्स को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं|
प्रमुख कारण:
यौन संचारित रोग (STI) या किसी अन्य इंफेक्शन के कारण यूट्रस, ट्यूब और आसपास के हिस्सों में सूजन आ सकती है, जिससे ट्यूब के अंदरूनी भागों को क्षति हो सकती है।
पेल्विक या जननांगों से जुड़ी टीबी ट्यूब के सिकुड़ने का कारण बन सकती है, जिससे अंदर चिपकाव या ब्लाॅकेज की समस्या हो सकती है।
गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टीश्यु (ऊतक) ट्यूब के आसपास या उस पर जम सकता है, जिससे स्कार टिश्यू और चिपकाव हो सकते हैं।
ऑपरेशन के बाद बनने वाले adhesions ट्यूब को मोड़ सकते हैं या उस पर दबाव बना सकते हैं।
कुछ मामलों में सूजन या लम्बे समय तक चलने वाली सूजन ट्यूब की आंतरिक परत को खराब कर सकती है जिससे परिणामस्वरूप गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।
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कारण |
असर |
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Infection / PID |
ट्यूब की अंदरूनी परत को नुकसान, ब्लॉकेज |
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Endometriosis |
ट्यूब मुड़ना, स्कार टिश्यू, चिपकना |
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Surgery |
ट्यूब पर दबाव होना या खिंचना, |
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Tuberculosis |
ट्यूब सिकुड़ सकती है या स्थायी ब्लाॅकेज की संभावना रहती है। |
किसी भी महिला में ट्यूब ब्लाॅकेज होने के लक्षण बाहरी तौर पर दिखाई नहीं देते हैं न ही कोई विशेष लक्षण महसूस होता है। आमतौर पर प्रेगनेंसी नहीं होने पर जांच की जाती है तब ट्यूबल ब्लाॅकेज के बारे में पता चलता है । कुछ महिलाओं में निम्न संभावित लक्षण हो सकते हैं।
संभावित लक्षण:
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लक्षण |
संभावित संकेत |
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प्रेग्नेंसी न होना |
ट्यूबल infertility की संभावना |
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Pelvic pain |
इंफेक्शन, एंडोमेट्रियोसिस, |
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दर्दनाक पीरियड्स |
पेल्विक इंफेक्शन या बीमारी का संकेत |
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Ectopic के लक्षण |
ट्यूब में प्रेग्नेंसी, मरीज के लिए इमरजेंसी हो सकती है |
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें फर्टिलाइजेशन के बाद भ्रूण गर्भाशय में चिपकने के बजाय ट्यूब या उसके आसपास कहीं और विकसित होने लगता है। यह स्थिति मरीज के लिए खतरनाक हो सकती है। आमतौर पर कुछ समय में इसमें गर्भपात हो जाता है लेकिन यदि नहीं होता है तो डाॅक्टर से कन्सल्ट करने की आवश्यकता होती है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी के कुछ केसेज में प्रेगनेंसी के लक्षण महसूस होते हैं जबकि ज्यादातर केसेज में कोई लक्षण नहीं होते हैं। पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत हो सकती है।
अगर महिला की एक ट्यूब ब्लाॅक है और दूसरी ट्यूब और अण्डाशय सही से काम कर रहे हों तो प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना रहती है। लेकिन अगर दोनों ट्यूब्स ब्लाॅक हो तो नेचुरल प्रेगनेंसी की संभावना नहीं रहती । ऐसी स्थिति में भी कुछ केसेज में हल्की या आंशिक ब्लाॅकेज होने पर सर्जरी या ट्यूबल कैन्युलेशन से कुछ लाभ हो सकता है लेकिन प्रेगनेंसी के चांसेस कम ही रहते हैं। यदि दोनों ट्यूब्स गंभीर रूप से या पूरी तरह से ब्लाॅक हो तो प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना नहीं रहती, ऐसे केसेज में आईवीएफ तकनीक को सबसे उपयोगी विकल्प माना जाता है । आईवीएफ तकनीक का आविष्कार भी 1978 में ब्लााॅक फैलोपियन ट्यूब में गर्भधारण करवाने के लिए किया गया था।
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स्थिति |
Pregnancy Chances |
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One tube blocked |
दूसरी ट्यूब ठीक हो तो नेचुरल pregnancy possible |
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Both tubes blocked |
IVF की जरूरत अधिक, नेचुरल chance बहुत कम |
आईवीएफ में फैलोपियन ट्यूब के काम को बायपास कर दिया जाता है। इसमें ट्यूब में होने वाली निषेचन की प्रक्रिया लैब में की जाती है ।
फैलोपियन ट्यूब में ब्लाॅकेज में बारे में पता लगाने के लिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, कुछ बेसिक टेस्ट जैसे हाॅर्मोन और अल्ट्रासाउण्ड की जांच करते हैं। ट्यूब की जानकारी के लिए कुछ स्पेशल जांचे की जाती हैं जिनमें शामिल हैं -
मुख्य जांचें:
इसमें एक्सरे के जरिए ट्यूब खुली हुई है या नहीं ये जानने के लिए पेट में डाई डाली लाती है।
आज के समय में डाॅक्टर्स इस जांच को अधिक प्राथमिकता देते हैं, यह जांच सरल है और अधिक सटिक परिणाम दिखाती है। इसमें कैमरे की मदद से पेट के अंदर ट्यूब, ओवरी और uterus को सीधे देखा जाता है, और जरूरत पड़ने पर समय इलाज भी किया जा सकता है।
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जांच |
उद्देश्य |
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HSG |
ट्यूब खुली है या नहीं, dye flow देखना |
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Laparoscopy |
ट्यूब, ओवरी, uterus की direct visualization |
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Ultrasound |
पेल्विक ऑर्गन्स का basic assessment |
HSG (हिस्ट्रोसाल्पिंगोग्राफी ) यह फैलोपियन ट्यूब की जांच के लिए किया जाने वाले काॅमन टेस्ट है। यह एक स्पेशल एक्स रे टेस्ट होता है जिसमें गर्भाशय और ट्यूब में हल्का रंगीन द्रव्य (contrast dye) डालकर ये देखा जाता है कि वह ट्यूब से आसानी से बाहर निकल पा रहा है या नहीं यदि डाई रुक जाती है या आगे नहीं बढ़ पाती है तो ट्यूब में ब्लाॅकेज की संभावना मानी जाती है।
सामान्यतया यह टेस्ट पीरियड (माहवारी) समाप्त होने के बाद और ओव्युलेशन (अण्डशय से अण्डा फेलोपियन ट्यूब में आना) से पहले किया जाता है।
वैसे तो यह टेस्ट दर्दरहित है लेकिन हल्का क्रेम्प या असहजता हो सकती है लेकिन असहनीय नहीं होता है।
टेस्ट से पहले इंफेक्शन या इसके अन्य रिस्क के बारे में जानकारी देते हैं।
ट्यूब ब्लाॅकेज का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि ब्लाॅकेज कहां पर है,कितना है और ट्यूब को कितना नुकसान पहुंचा चुका है। वैसे तो दवाओं और सर्जरी से उपचार संभव है लेकिन कई बार सर्जरी या दवाओं के बाद भी प्रेगनेंसी नहीं हो पाती है।
संभावित विकल्प:
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इलाज |
कब उपयोग होता है |
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Medicines |
इंफेक्शन, शुरुआती सूजन |
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Surgery |
चिपकाव, एंडोमेट्रियोसिस, सीमित ब्लॉकेज |
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Tubal cannulation |
ट्यूब के शुरुआत में हल्का ब्लॉकेज |
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IVF |
गंभीर/दोनों ट्यूब ब्लॉक, सर्जरी फेल, अधिक उम्र |
कई केसेज में ब्लाॅकेज खोलने के ओपरेशन के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पाता है इस स्थिति में डाॅक्टर्स सर्जरी की तुलना में आईवीएफ तकनीक का सहारा लेने की सलाह देते हैं।
अक्सर कपल ये जानना चाहते हैं कि ट्यूब ब्लाॅक होने की स्थिति में क्या किया जाए या आईवीएफ की जरूरत कब होती है तो दोनों ट्यूब ब्लाॅक होेने या ट्यूब के सही से काम नहीं करने पर आईवीएफ ट्रीटमेंट मददगार साबित हो सकता है। इसमें अंडे और स्पर्म को महिला के शरीर के बाहर लैब में मिलाया जाता है जिससे फर्टिलाईजेशन हो जाता है यानि ट्यूब के काम को लैब में किया जाता है । लैब में बने भ्रूण को महिला के गर्भशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
किन स्थिति में आईवीएफ उपयोगी -
इन स्थितियों में डॉक्टर अक्सर IVF की सलाह देते हैं।
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स्थिति |
IVF जरूरत |
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Both tubes blocked |
High - अक्सर recommended |
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Severe tubal damage |
IVF preferred |
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Failed surgery |
IVF strongly recommended |
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Advanced age (35+) |
IVF से success chances बेहतर हो सकते हैं |
हाँ, ट्यूब में किसी तरह की समस्या होने पर एक्टोपिक प्रेगनेंसी के चांसेज बढ़ जाते हैं। जब ट्यूब के अंदर रुकावट,सूजन या नुकसान हो, तो अंडा और स्पर्म ट्यूब के अंदर ही फंस सकते हैं और वहीं प्रेग्नेंसी हो सकती है इसे ट्यूबल या ectopic pregnancy कहा जाता है। यह स्थिति इमरजेंसी मानी जाती है, क्योंकि ट्यूब फटने पर तेज ब्लीडिंग का खतरा होता है।
एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण
किसी महिला को इस तरह के लक्षण महसूस होते हैं तो उन्हें तुरन्त मेडिकल सहायता लेने के लिए डाॅक्टर से कन्सल्ट करना चाहिए।
चूंकि फैलोपियन ट्यूब ब्लाॅकेज के लक्षण बाहर से नजर नहीं आते हैं इस कारण समय पर डायग्नोज करना आसान नहीं होता है। ब्लाॅकेज को रोकना भी आसान नहीं होता है लेकिन कुछ सावधानियां अपना कर इसके जोखिम को कम किया जा सकता है।
आपके हिसाब से - युवाओं में prevention के लिए सबसे ज्यादा किस चीज़ पर awareness ज़रूरी है?
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स्थिति |
कब मिलें |
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स्थिति |
कब मिलें |
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प्रेग्नेंसी न होना |
6–12 महीने में फर्टिलिटी evaluation मूल्यांकन |
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Pelvic pain |
तुरंत गाइनी/फर्टिलिटी specialist विशेषज्ञ से मिलें |
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IVF planning |
फर्टिलिटी विशेषज्ञ से detailed consultation |
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Ectopic का इतिहास |
जल्दी evaluation मूल्यांकन और future planning योजना |
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इन्दिरा आईवीएफ निःसंतानता उपचार के क्षेत्र में परिचित नाम है। अत्याुधनिक जांच और उपचार सुविधाओं के साथ यहां पर पेशेन्ट सेन्ट्रिक ट्रीटमेंट प्लान बनाया जाता है।
यहां पर
डॉक्टर्स फैलोपियन ट्यूब ओपन करने के लिए आमतौर पर लैप्रोस्कोपी या हिस्टेरोस्कोपी जैसी सर्जरी का ऑप्शन सेजस्ट करते हैं। कुछ केसेज में हाइड्रोट्यूबेशन या ट्यूबल कैन्युलेशन जैसी प्रक्रियाओं की सलाह दी जाती है। ट्यूबल ब्लॉकेज के कारण निःसंतानता होने पर ट्यूब खुलवाने का ऑपरेशन करवाने पर भी गर्भधारण होने के चांसेज कम ही होते हैं।
भारत में फैलोपियन ट्यूब खोलने की सर्जरी की लागत अस्पताल, शहर और डॉक्टर के अनुभव और इलाज की विधि पर निर्भर करती है। आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब खोलने की सर्जरी में लगभग ₹25,000 से ₹1,00,000 तक का खर्च हो सकता है।
फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक यानि बंद होने का पीरियड्स पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है। पीरियड्स अण्डाशय और यूट्रस के हार्मोन से नियंत्रित होते हैं, न कि ट्यूब से। अगर ब्लॉकेज इंफेक्शन या एंडोमेट्रियोसिस के कारण हुआ है तो पीरियड्स असामान्यता देखी जा सकती है।
फैलोपियन ट्यूब खोलने के लिए कुछ लोग देशी उपचार लेते हैं हालांकि इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। कुल लोग आयुर्वेदिक उपचार भी अपनाते हैं । किसी भी तरह का उपचार अपनाने से पहले डॉक्टर से कन्सल्ट जरूर करना चाहिए ताकि कोई नुकसान नहीं हो।
फैलोपियन ट्यूब में सूजन को “सैल्पिंजाइटिस“ कहते हैं। सामान्यतया यह बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होती है, जैसे क्लैमाइडिया या गोनोरिया। सूजन के कारण ट्यूब में ब्लॉकेज हो सकता है, जिससे निःसंतानता की समस्या हो सकती है। इसके लक्षणों में पीरियड में असामान्यता, पेट दर्द, असामान्य डिस्चार्ज और बुखार महसूस हो सकते हैं।
हाँ, बिल्कुल यदि आपकी एक फैलोपियन ट्यूब बंद है और दूसरी खुली है और सामान्य रूप से काम कर रही है, तो आप गर्भधारण कर सकती हैं। अण्डाशय से अंडा उस ट्यूब से निकल सकता है जो सही से काम कर रही है तो फर्टिलाइजेशन हो सकता है। एक ट्यूब खुली होने पर गर्भधारण के चांसेस कम हो सकते हैं।
फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज होने का मतलब है कि ट्यूब यानि नली किसी कारण से बंद हो जाती है जिससे अंडाशय से निकले अंडे और शुक्राणु का मिलन या फर्टिलाइज्ड अंडे का गर्भाशय तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इस कारण प्राकृतिक गर्भधारण प्रभावित होता है। इस तरह की समस्या के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं आमतौर पर इसके बारे में तब पता चलता है जब गर्भधारण में समस्या होती है।
इसके सबसे सामान्य कारणों में पेल्विक इंफ्लामेंट्री डिजिज, इंफेक्शन, एंडोमेट्रियोसिस, पेट या पेल्विक सर्जरी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (एसटीआई) या एक्टोपिक प्रेगनेंसी शामिल हैं।
किसी महिला की एक ट्यूब ब्लाॅक है और दूसरी ट्यूब सही से काम कर रही है तो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना संभव है। अगर दोनों ट्यूब ब्लाॅक है तो प्राकृतिक गर्भधारण के चांसेज नहीं होते हैं ऐसे में आईवीएफ जैसी तकनीकों की जरूरत पड़ सकती है।
ट्यूबल ब्लाॅकेज की स्थिति में महिला को किसी तरह के लक्षण सीधे तौर पर महसूस नहीं होते हैं। कुछ केसेज में पेट के निचले भाग में दर्द, दर्दभरे पीरियड्स, सेक्स के दौरान दर्द, प्रेगनेंट होने में समस्या आदि संकेत सामने आ सकते हैं।
HSG कई वर्षों से उपयोग में आने वाला एक स्थापित डायग्नोस्टिक टेस्ट है। HSG यानी हिस्ट्रोसालपिंगोग्राफी एक तरह का एक्स रे टेस्ट है जिसमें गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए डाई डालकर देखा जाता है कि ये सही से काम कर रहे हैं या नहीं । साथ दोनो की बनावट देखी जाती है।
आमतौर पर यह दर्दनाक नहीं होता है कुछ महिलाओं को हल्की ऐंठन या discomfort हो सकता है लेकिन ज्यादातर महिलाएं कम्फर्ट महसूस करती हैं। डाॅक्टर को जरूरत लगने पर दर्द करने की दवाई दे सकते हैं।
इलाज ब्लाॅकेज की जगह, कारण और कितना बड़ा है इस बात पर निर्भर करता है। शुरूआत या छोटे ब्लाॅकेज के मामलो में cannulation कैन्यूलेशन से ट्यूब खोली जा सकती है, जबकि distal ब्लॉकेज या hydrosalpinx हाइड्रोसैल्पिंक्स में surgery या tube removal की जरूरत पड़ सकती है।
सभी केसेज में blocked tube surgery से ठीक नहीं होती | यदि स्कार टिश्यु ज्यादा मात्रा में हैं या ट्यूब खराब हो गयी हो तो सर्जरी करवाने का भी फायदा नहीं होगा। अगर दोनों ट्यूब खराब हो तो सर्जरी का लाभ नहीं है साथ ही अगर सर्जरी असफल हो जाती है तो आईवीएफ बेहतर विकल्प हो सकता है। क्योंकि इसमें ट्यूब के काम को लैब में किया जाता है।
अगर ट्यूब ब्लाॅक है या किसी तरह से डेमेज है तो इसमें एक्टोपिक प्रेगनेंसी के चांसेज बढ़ जाते हैं। पेल्विक इन्फ्लामेंट्री डिजिज और दूसरे इंफेक्शन ट्यूब को scarred बनाकर ब्लाॅकेज और एक्टोपिक प्रेगनेंसी या दोनों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
पीसीओएस और ट्यूबल ब्लाॅकेज महिलाओं में अलग-अलग समस्याएं हैं। पीसीओएस मुख्य रूप से हार्मोन संबंधी समस्या है जो ओव्युलेशन से जुड़ी हुई है और ट्यूबल ब्लाॅकेज में ट्यूब बंद हो जाती है। लप्रोस्काॅपी की आवश्यकता हर मरीज को नहीं होती है लेकिन ट्यूब की स्थिति, एण्डोमेट्रियोसिस या ट्यूब को कितनी क्षति हुई है यह देखने के लिए किया जा सकता है। जब किसी महिला उम्र 35 वर्ष से कम हो तो उसे एक साल तक प्रयास करने के बाद भी गर्भधारण नहीं होने पर और 35 वर्ष से अधिक हो तो 6 माह तक प्रयास के बाद डाॅक्टर से कन्सल्ट करना चाहिए।