PCOD को कैसे ठीक करें? लाइफस्टाइल में सुधार और माँ बनने का सफर

Last updated: January 16, 2026

Overview

बहुत समय तक प्रयास करने के बाद भी जब माँ बनने का सपना पूरा न हो रहा हो और इसी क्रम में जब डॉक्टर पीसीओडी (PCOD) का नाम लेते हैं, तो मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि आखिर pcod ko kaise thik kare? अक्सर महिलाएं इसे एक लाइलाज बीमारी समझकर डर जाती हैं, लेकिन असल में यह आपके शरीर का एक इशारा है कि उसे थोड़े बदलाव की जरूरत है। पीसीओडी को ठीक करने का मतलब केवल दवाएं लेना नहीं है, बल्कि अपनी बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल को सुधारकर मन, शरीर और हॉर्मोन को वापस बैलेंस में लाना है। यह समस्या आपकी माँ बनने की राह में एक रुकावट जरूर लग सकती है, लेकिन सही जानकारी और सही कदम के साथ इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है।

पीसीओडी क्या होता है?

पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज (Polycystic Ovarian Disease) किसी महिला के शरीर में हुयी हार्मोनल गड़बड़ी होती है। इसमें महिला की ओवरी (Ovary) के अंदर बहुत सारे इमैच्योर (Immature) अंडे यानी एग्स (Eggs) जमा हो जाते हैं, जो समय पर रिलीज नहीं हो पाते। जब कोई महिला पूछती है कि pcod ko kaise thik kare, तो उसे यह समझना होगा कि यह समस्या तब शुरू होती है जब शरीर में मेल हार्मोन्स का लेवल बढ़ जाता है। इसकी वजह से पीरियड्स अपनी तारीख से आगे बढ़ जाते हैं और ओव्यूलेशन (Ovulation) की प्रक्रिया रुक जाती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि पीसीओडी आपकी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या है, और जैसे ही आप अपनी आदतों में सुधार करती हैं, शरीर वापस पटरी पर आने लगता है।

क्या पीसीओडी को जड़ से ठीक किया जा सकता है?

जैसा की बताया गया है कि पीसीओडी एक हॉर्मोन से जुड़ी समस्या है जिसे 'क्योर' (Cure) यानी जड़ से सही करना अर्थात इसे 'मैनेज' (Manage) करना ही है। इसका मतलब यह है कि आप अपनी लाइफस्टाइल को इतना बेहतर बना लेती हैं कि पीसीओडी के लक्षण गायब हो जाते हैं और आपका शरीर बिल्कुल एक नॉर्मल इंसान की तरह काम करने लगता है। इसे ठीक करने का असली पैमाना आपके नियमित पीरियड्स और हेल्दी ओव्यूलेशन है। यदि आपके पीरियड्स समय पर आ रहे हैं और आप नेचुरल तरीके से कंसीव (Conceive) कर पा रही हैं, तो समझ लीजिए कि आपने पीसीओडी पर जीत हासिल कर ली है।

वजन और इंसुलिन (Insulin) का आपस में क्या संबंध है?

पीसीओडी वाली महिलाओं में अक्सर 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' देखा जाता है, यानी उनका शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता। इंसुलिन हमारे शरीर में शुगर को पचाने का काम करता है। जब शरीर में इंसुलिन का लेवल बढ़ता है, तो यह सीधे ओवरी पर असर डालता है, जिसकी वजह से मेल हॉर्मोन ज्यादा बनते हैं। यही कारण है कि पीसीओडी में वजन घटाना बहुत मुश्किल हो जाता है। pcod ko kaise thik kare इसके लिए आपको ऐसी चीजों पर ध्यान देना होगा जो आपके इंसुलिन लेवल को स्थिर रखें।

पीसीओडी ठीक करने की डाइट क्या है?

खान-पान ही पीसीओडी का सबसे बड़ा और सटीक इलाज है। आपको अपनी डाइट को 'दवाई' की तरह देखना होगा।

  • खमैदा और चीनी को कहें बाय: बिस्किट, ब्रेड, मिठाई और कोल्ड ड्रिंक्स आपके इंसुलिन को अचानक बढ़ा देते हैं। इन्हें अपनी लिस्ट से पूरी तरह हटा दें।
  • प्रोटीन को बढ़ाएं:दालें, पनीर, सोयाबीन और अंडे को अपनी हर भोजन का हिस्सा बनाएं। प्रोटीन आपको लंबे समय तक भरा हुआ रखता है।
  • फाइबर वाली चीजें: चोकर वाला आटा, ओट्स और हरी सब्जियां आपके पाचन यानी डाइजेशन को सुधारती हैं और हार्मोन्स को बैलेंस करती हैं।
  • घर का बना खाना: बाहर के जंक फूड में खराब तेल और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं जो पीसीओडी के लक्षणों को और बिगाड़ देते हैं।

एक्सरसाइज का सही तरीका क्या होना चाहिए?

अगर आप सोच रही हैं कि pcod ko kaise thik kare, तो बिना एक्सरसाइज के यह मुमकिन नहीं है।

  • वेट ट्रेनिंग: हफ्ते में 2-3 दिन हल्के वजन उठाना या बॉडी-वेट एक्सरसाइज जैसे पुश-अप्स या स्क्वॉट्स करना बहुत फायदेमंद है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाता है जिससे इंसुलिन बेहतर काम करता है।
  • रोजाना वॉक:कम से कम 30 मिनट की तेज सैर यानी ब्रिस्क वाकिंग (Brisk Walking) आपके मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को बढ़ाती है।
  • योग और प्राणायाम:कपालभाति और सूर्य नमस्कार जैसे योगासन आपके पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो को सुधारते हैं।

पीसीओडी ठीक करने के पारंपरिक और घरेलू तरीके

हमारी रसोई में कुछ ऐसी चीजें हैं जो पीसीओडी में कमाल का असर दिखाती हैं।

  • दालचीनी (Cinnamon):यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में बहुत असरदार है। आप आधा चम्मच दालचीनी पाउडर पानी या दही के साथ ले सकती हैं।
  • मेथी का पानी: रात भर भीगे हुए मेथी दानों का पानी सुबह पीने से मेटाबॉलिज्म सुधरता है।
  • पुदीने की चाय: यह शरीर में मेल हार्मोन्स को कम करने और चेहरे के बालों को रोकने में मदद करती है।

मेडिकल ट्रीटमेंट कब जरूरी होता है?

कभी-कभी लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ-साथ डॉक्टरी इलाज की भी जरूरत पड़ती है। फर्टिलिटी क्लिनिक में डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर कुछ दवाएं शुरू कर सकते हैं।

  • मेटफॉर्मिन (Metformin):यह दवा इंसुलिन लेवल को कंट्रोल करने के लिए दी जाती है।
  • हार्मोनल पिल्स: अगर पीरियड्स बहुत ज्यादा अनियमित हैं, तो उन्हें ट्रैक पर लाने के लिए डॉक्टर कुछ समय के लिए पिल्स (Pills) दे सकते हैं।
  • ओव्यूलेशन इंडक्शन: अगर आप बेबी प्लान कर रही हैं, तो एग्स (Eggs) को समय पर रिलीज करने के लिए कुछ दवाएं दी जाती हैं।

पीसीओडी में कंसीव करने में क्या समस्यायें आती हैं?

पीसीओडी वाली महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि क्या वे माँ बन पाएंगी? मुख्य समस्या यह है कि एग्स समय पर रिलीज नहीं होते, जिसे 'एनोव्यूलेशन' कहते हैं। इसके बिना स्पर्म एग्स से नहीं मिल पाता। लेकिन याद रखें, पीसीओडी का मतलब निःसंतानता नहीं है। सही डाइट और थोड़े वजन कम करने से ही कई महिलाएं नेचुरल तरीके से कंसीव कर लेती हैं। यहाँ तक कि वजन में केवल 5% की कमी भी आपके ओव्यूलेशन को दोबारा शुरू करने के लिए काफी हो सकती है।

मेडिकल ट्रीटमेंट कब जरूरी होता है?

अगर तमाम कोशिशों के बाद भी प्रेगनेंसी नहीं रुक रही है, तो आईवीएफ (IVF - In Vitro Fertilization) एक बहुत ही भरोसेमंद विकल्प हो सकता है।

  • बेहतर सक्सेस रेट: पीसीओडी पेशेंट्स में एग्स की संख्या अच्छी होती है, इसलिए आईवीएफ के दौरान कई हेल्दी एम्ब्रीओ (Embryo) बनने की संभावना रहती है।
  • कंट्रोल्ड ट्रीटमेंट: आईवीएफ क्लिनिक में डॉक्टर इंजेक्शन के जरिए एग्स की ग्रोथ को मॉनिटर (Monitor) करते हैं और सही समय पर उन्हें शरीर से बाहर निकालकर फर्टिलाइज करते हैं।
  • आईवीएम (IVM): यह पीसीओडी पेशेंट्स के लिए एक वरदान जैसी तकनीक है जहाँ इमैच्योर एग्स को बाहर निकालकर लैब में मैच्योर किया जाता है, जिससे दवाओं के साइड इफेक्ट्स का खतरा कम हो जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

पीसीओडी को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी रुकावट न बनने दें। pcod ko kaise thik kare इसका असली जवाब दवाइयों में नहीं, बल्कि आपकी अपनी आदतों में छिपा है। हर वह कदम जो आप एक पौष्टिक भोजन या 20 मिनट की सैर के रूप में उठाती हैं, वह आपको इस समस्या से बाहर निकाल सकता है। आपका शरीर कोई मशीन नहीं है, इसे थोड़ा वक्त दें और खुद पर भरोसा रखें। आधुनिक मेडिकल साइंस और फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स के पास आज हर उस समस्या का समाधान है जो पीसीओडी की वजह से आपके सामने खड़ी होती है। चाहे आप नेचुरल तरीके से कोशिश करें या आईवीएफ (IVF) जैसी आधुनिक तकनीक की मदद लें, माँ बनने का आपका सपना पूरी तरह मुमकिन है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या पीसीओडी में दूध पीना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?

 

यह हर महिला के शरीर पर निर्भर करता है। अगर आपको दूध पीने से मुंहासे या पेट फूलने (Bloating) की समस्या होती है, तो आप इसे कुछ समय के लिए छोड़कर देख सकती हैं।

क्या बिना वजन कम किए पीसीओडी ठीक हो सकता है?

 

अगर आपका वजन पहले से ही संतुलित है (लीन पीसीओडी), तो आपको केवल डाइट और हार्मोन्स बैलेंस करने पर ध्यान देना होगा। लेकिन अगर वजन ज्यादा है, तो इसे कम करना ही सबसे सटीक इलाज है।

क्या पीसीओडी की वजह से भविष्य में कोई और बीमारी हो सकती है?

 

अगर पीसीओडी को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो यह टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) का खतरा बढ़ा सकता है।

क्या पीसीओडी में कंसीव करने के लिए आईवीएफ (IVF) ही आखिरी रास्ता है?

 

नहीं, आईवीएफ (IVF) तब सुझाया जाता है जब दवाएं और आईयूआई (IUI) जैसे आसान तरीके काम नहीं करते। ज़्यादातर महिलाएं सामान्य इलाज से भी माँ बन जाती हैं।

क्या स्ट्रेस कम करने से पीरियड्स समय पर आ सकते हैं?

 

हाँ, बहुत ज्यादा तनाव हार्मोन्स के सिग्नल को बिगाड़ देता है। तनाव कम करने से पीसीओडी के लक्षणों में काफी सुधार देखा गया है।

क्या पीसीओडी में चावल खाना मना है?

 

सफेद चावल के बजाय ब्राउन राइस (Brown rice) या हाथ का कुटा हुआ चावल खाना बेहतर है क्योंकि इनमें फाइबर ज्यादा होता है।

आईवीएफ (IVF) में पीसीओडी पेशेंट्स की सफलता दर कैसी होती है?

 

पीसीओडी पेशेंट्स में एग्स की संख्या अधिक होने के कारण आईवीएफ की सक्सेस रेट (Success Rate) बहुत अच्छी रहती है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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