बहुत समय तक प्रयास करने के बाद भी जब माँ बनने का सपना पूरा न हो रहा हो और इसी क्रम में जब डॉक्टर पीसीओडी (PCOD) का नाम लेते हैं, तो मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि आखिर pcod ko kaise thik kare? अक्सर महिलाएं इसे एक लाइलाज बीमारी समझकर डर जाती हैं, लेकिन असल में यह आपके शरीर का एक इशारा है कि उसे थोड़े बदलाव की जरूरत है। पीसीओडी को ठीक करने का मतलब केवल दवाएं लेना नहीं है, बल्कि अपनी बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल को सुधारकर मन, शरीर और हॉर्मोन को वापस बैलेंस में लाना है। यह समस्या आपकी माँ बनने की राह में एक रुकावट जरूर लग सकती है, लेकिन सही जानकारी और सही कदम के साथ इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है।
पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज (Polycystic Ovarian Disease) किसी महिला के शरीर में हुयी हार्मोनल गड़बड़ी होती है। इसमें महिला की ओवरी (Ovary) के अंदर बहुत सारे इमैच्योर (Immature) अंडे यानी एग्स (Eggs) जमा हो जाते हैं, जो समय पर रिलीज नहीं हो पाते। जब कोई महिला पूछती है कि pcod ko kaise thik kare, तो उसे यह समझना होगा कि यह समस्या तब शुरू होती है जब शरीर में मेल हार्मोन्स का लेवल बढ़ जाता है। इसकी वजह से पीरियड्स अपनी तारीख से आगे बढ़ जाते हैं और ओव्यूलेशन (Ovulation) की प्रक्रिया रुक जाती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि पीसीओडी आपकी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या है, और जैसे ही आप अपनी आदतों में सुधार करती हैं, शरीर वापस पटरी पर आने लगता है।
जैसा की बताया गया है कि पीसीओडी एक हॉर्मोन से जुड़ी समस्या है जिसे 'क्योर' (Cure) यानी जड़ से सही करना अर्थात इसे 'मैनेज' (Manage) करना ही है। इसका मतलब यह है कि आप अपनी लाइफस्टाइल को इतना बेहतर बना लेती हैं कि पीसीओडी के लक्षण गायब हो जाते हैं और आपका शरीर बिल्कुल एक नॉर्मल इंसान की तरह काम करने लगता है। इसे ठीक करने का असली पैमाना आपके नियमित पीरियड्स और हेल्दी ओव्यूलेशन है। यदि आपके पीरियड्स समय पर आ रहे हैं और आप नेचुरल तरीके से कंसीव (Conceive) कर पा रही हैं, तो समझ लीजिए कि आपने पीसीओडी पर जीत हासिल कर ली है।
पीसीओडी वाली महिलाओं में अक्सर 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' देखा जाता है, यानी उनका शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता। इंसुलिन हमारे शरीर में शुगर को पचाने का काम करता है। जब शरीर में इंसुलिन का लेवल बढ़ता है, तो यह सीधे ओवरी पर असर डालता है, जिसकी वजह से मेल हॉर्मोन ज्यादा बनते हैं। यही कारण है कि पीसीओडी में वजन घटाना बहुत मुश्किल हो जाता है। pcod ko kaise thik kare इसके लिए आपको ऐसी चीजों पर ध्यान देना होगा जो आपके इंसुलिन लेवल को स्थिर रखें।
खान-पान ही पीसीओडी का सबसे बड़ा और सटीक इलाज है। आपको अपनी डाइट को 'दवाई' की तरह देखना होगा।
अगर आप सोच रही हैं कि pcod ko kaise thik kare, तो बिना एक्सरसाइज के यह मुमकिन नहीं है।
हमारी रसोई में कुछ ऐसी चीजें हैं जो पीसीओडी में कमाल का असर दिखाती हैं।
कभी-कभी लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ-साथ डॉक्टरी इलाज की भी जरूरत पड़ती है। फर्टिलिटी क्लिनिक में डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर कुछ दवाएं शुरू कर सकते हैं।
पीसीओडी वाली महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि क्या वे माँ बन पाएंगी? मुख्य समस्या यह है कि एग्स समय पर रिलीज नहीं होते, जिसे 'एनोव्यूलेशन' कहते हैं। इसके बिना स्पर्म एग्स से नहीं मिल पाता। लेकिन याद रखें, पीसीओडी का मतलब निःसंतानता नहीं है। सही डाइट और थोड़े वजन कम करने से ही कई महिलाएं नेचुरल तरीके से कंसीव कर लेती हैं। यहाँ तक कि वजन में केवल 5% की कमी भी आपके ओव्यूलेशन को दोबारा शुरू करने के लिए काफी हो सकती है।
अगर तमाम कोशिशों के बाद भी प्रेगनेंसी नहीं रुक रही है, तो आईवीएफ (IVF - In Vitro Fertilization) एक बहुत ही भरोसेमंद विकल्प हो सकता है।
पीसीओडी को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी रुकावट न बनने दें। pcod ko kaise thik kare इसका असली जवाब दवाइयों में नहीं, बल्कि आपकी अपनी आदतों में छिपा है। हर वह कदम जो आप एक पौष्टिक भोजन या 20 मिनट की सैर के रूप में उठाती हैं, वह आपको इस समस्या से बाहर निकाल सकता है। आपका शरीर कोई मशीन नहीं है, इसे थोड़ा वक्त दें और खुद पर भरोसा रखें। आधुनिक मेडिकल साइंस और फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स के पास आज हर उस समस्या का समाधान है जो पीसीओडी की वजह से आपके सामने खड़ी होती है। चाहे आप नेचुरल तरीके से कोशिश करें या आईवीएफ (IVF) जैसी आधुनिक तकनीक की मदद लें, माँ बनने का आपका सपना पूरी तरह मुमकिन है।
यह हर महिला के शरीर पर निर्भर करता है। अगर आपको दूध पीने से मुंहासे या पेट फूलने (Bloating) की समस्या होती है, तो आप इसे कुछ समय के लिए छोड़कर देख सकती हैं।
अगर आपका वजन पहले से ही संतुलित है (लीन पीसीओडी), तो आपको केवल डाइट और हार्मोन्स बैलेंस करने पर ध्यान देना होगा। लेकिन अगर वजन ज्यादा है, तो इसे कम करना ही सबसे सटीक इलाज है।
अगर पीसीओडी को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो यह टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) का खतरा बढ़ा सकता है।
नहीं, आईवीएफ (IVF) तब सुझाया जाता है जब दवाएं और आईयूआई (IUI) जैसे आसान तरीके काम नहीं करते। ज़्यादातर महिलाएं सामान्य इलाज से भी माँ बन जाती हैं।
हाँ, बहुत ज्यादा तनाव हार्मोन्स के सिग्नल को बिगाड़ देता है। तनाव कम करने से पीसीओडी के लक्षणों में काफी सुधार देखा गया है।
सफेद चावल के बजाय ब्राउन राइस (Brown rice) या हाथ का कुटा हुआ चावल खाना बेहतर है क्योंकि इनमें फाइबर ज्यादा होता है।
पीसीओडी पेशेंट्स में एग्स की संख्या अधिक होने के कारण आईवीएफ की सक्सेस रेट (Success Rate) बहुत अच्छी रहती है।