सर्विक्स (Cervix) यानी गर्भाशय ग्रीवा प्रेगनेंसी और फर्टिलिटी दोनों में अहम भूमिका निभाता है। कई बार इसका साइज सामान्य से थोड़ा बड़ा हो जाता है, जिसे हाइपरट्रॉफाइड सर्विक्स (hypertrophied cervix) कहा जाता है। यह समझना जरूरी है कि सर्विक्स का साइज बढ़ना हमेशा समस्या का संकेत नहीं होता। कुछ स्थितियों में यह शरीर का सामान्य बदलाव होता है, जबकि कुछ मामलों में इसके पीछे सूजन, इंफेक्शन या अन्य कारण हो सकते हैं। इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि सर्विक्स बड़ा क्यों है, बल्कि यह है कि उसके पीछे कारण क्या है और क्या किसी इलाज की जरूरत है।
इस आर्टिकल, hypertrophied cervix meaning in hindi, में हम आसान तरीके से समझेंगे कि हाइपरट्रॉफाइड सर्विक्स किन वजहों से होता है, कब यह सामान्य माना जाता है,और किन स्थितियों में इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। साथ ही हम यह भी देखेंगे कि इसका फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ सकता है और कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
सर्विक्स (cervix) गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) का निचला हिस्सा है जो योनि मतलब वेजाइना (vegina) से जुड़ा होता है। इसे हिंदी में गर्भाशय ग्रीवा कहते हैं।
सर्विक्स का काम है प्रेगनेंसी में बच्चे को सहायता देना, पीरियड के दौरान ब्लड को बाहर आने देना, और स्पर्म को यूट्रस में घुसने के लिए रास्ता देना। सामान्य सर्विक्स की लंबाई 2.5 से 3.5 cm होती है और चौड़ाई लगभग 2 से 3 cm होती है। अगर सर्विक्स इससे ज़्यादा बड़ा है तो उसे Hypertrophied cervix या बल्की सर्विक्स कहते हैं।
हाइपरट्रॉफी का मतलब है किसी अंग का साइज बढ़ जाना। Hypertrophied cervix में सर्विक्स के टिश्यू फूल जाते हैं या मोटे हो जाते हैं। यह दो तरह से होता है।
पहला है सर्विकल हाइपरट्रॉफी (cervical hypertrophy) जिसमें सर्विक्स मोटा और बड़ा हो जाता है लेकिन लंबाई सामान्य रहती है।
दूसरा है सर्विकल एलॉन्गेशन (cervical elongation) जिसमें सर्विक्स लंबा हो जाता है और कभी-कभी वेजाइना में नीचे तक आ जाता है। अगर आपकी रिपोर्ट में "बल्की सर्विक्स" या "सर्विकल हाइपरट्रॉफी" लिखा हो तो दोनों का बेसिक मतलब एक ही है कि आपकी सर्विक्स का साइज नॉर्मल साइज से बड़ा है।
सर्विक्स बड़ा होने के कई कारण हो सकते हैं।
डिलीवरी के बाद सर्विक्स का आकार थोड़ा बड़ा रहना सामान्य है, ख़ासकर कई डिलीवरी के बाद। गर्भावस्था में हार्मोनल परिवर्तन से सर्विक्स प्राकृतिक रूप से बड़ा और नरम हो जाता है। नाबोथियन सिस्ट (nabothian cyst) सर्विक्स पर छोटी-छोटी बलगम से भरी सिस्ट बन जाती हैं। ये हानिरहित होती हैं और ट्रीटमेंट की ज़रूरत नहीं होती।
क्रोनिक सर्विकाइटिस (chronic cervicitis) सर्विक्स में लंबे समय से इन्फेक्शन रहे तो टिश्यू में सूजन और मोटाई आ जाती है। सर्विकल पॉलिप (cervical polyp) यानी सर्विक्स पर छोटी ग्रोथ हो जाती है जो ब्लीडिंग कर सकती है। सर्विकल फाइब्रॉइड (cervical fibroid) में यूटेराइन फाइब्रॉइड का एक प्रकार है जो सर्विक्स में विकसित होता है और उसका साइज बढ़ा देता है।
कई बार हाइपरट्रॉफाइड सर्विक्स का कोई लक्षण नहीं होता और यह नियमित अल्ट्रासाउंड में पता चलता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में लक्षण दिख सकते हैं।
ध्यान रखें कि ये लक्षण सिर्फ इसी स्थिति के नहीं होते, इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता है।
हाइपरट्रॉफाइड सर्विक्स का पता लगाने के लिए डॉक्टर एक से ज्यादा तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि कारण को सही तरीके से समझा जा सके।
सबसे पहले पेल्विक एग्ज़ामिनेशन (pelvic examination) किया जाता है, जिसमें डॉक्टर सर्विक्स का साइज और उसकी स्थिति हाथ से चेक करते हैं। इसके बाद ट्रांसवजाइनल यानी TVS अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जिससे सर्विक्स की लंबाई, मोटाई और किसी भी तरह की ग्रोथ या बदलाव का पता चलता है।
सर्विक्स की सतह को समझने के लिए पैप स्मीयर (Pap smear) किया जाता है। इसमें सेल्स का सैंपल लेकर यह देखा जाता है कि कहीं कोई असामान्य या कैंसर से जुड़े बदलाव तो नहीं हैं। यह एक महत्वपूर्ण स्क्रीनिंग टेस्ट माना जाता है।
अगर पैप स्मीयर में कोई गड़बड़ी दिखाई देती है, तो कोल्पोस्कोपी (colposcopy) की जाती है। इसमें एक विशेष माइक्रोस्कोप से सर्विक्स को करीब से देखा जाता है ताकि संदिग्ध हिस्से को पहचाना जा सके।
अगर किसी हिस्से में ज्यादा संदेह हो, तो बायोप्सी (biopsy) की जाती है। इसमें उस हिस्से से छोटा सा टिश्यू सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है, जिससे सही कारण की पुष्टि हो सके।
यह भी पढ़ें : पीरियड के दर्द को कम करने के टिप्स
हाइपरट्रॉफाइड सर्विक्स अपने आप में फर्टिलिटी को सीधे प्रभावित नहीं करता, लेकिन इसके पीछे के कारण असर डाल सकते हैं। अगर क्रोनिक सर्विसाइटिस (chronic cervicitis) है, तो सर्विकल म्यूकस की क्वालिटी खराब हो सकती है, जिससे स्पर्म को आगे बढ़ने में दिक्कत होती है। इन्फेक्शन की वजह से सर्विक्स में सूजन आ जाए तो यह रास्ता और मुश्किल हो सकता है।
अगर सर्विक्स में फाइब्रॉइड (fibroid) या बड़ा पॉलिप (polyp) है और वह रास्ता ब्लॉक कर रहा है, तो स्पर्म का यूट्रस तक पहुँचना प्रभावित हो सकता है।
प्रेगनेंसी में कुछ मामलों में सर्विक्स कमजोर हो सकता है, जिसे सर्वाइकल इनसफिशिएंसी (cervical insufficiency) कहा जाता है। इसमें सर्विक्स समय से पहले खुल सकता है, जिससे प्रीटर्म डिलीवरी या दूसरी तिमाही में मिसकैरेज का रिस्क बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर सर्विक्स की लंबाई मॉनिटर करते हैं और जरूरत हो तो सर्विकल सर्क्लाज (cervical cerclage) किया जाता है।
IVF में बड़ा सर्विक्स कभी-कभी एम्ब्रीओ ट्रांसफर के दौरान हल्की मुश्किल कर सकता है, लेकिन अनुभवी डॉक्टर इसे आसानी से मैनेज कर लेते हैं।
हाइपरट्रॉफाइड सर्विक्स का ट्रीटमेंट पूरी तरह उसके कारण पर निर्भर करता है। हर केस में इलाज जरूरी नहीं होता।
अगर यह डिलीवरी के बाद का सामान्य बदलाव है, नाबोथियन सिस्ट (nabothian cyst) है या कोई लक्षण नहीं हैं, तो सिर्फ़ नियमित फॉलो-अप ही काफी होता है।
अगर वजह संक्रमण है, जैसे क्रोनिक सर्विसाइटिस (chronic cervicitis), तो एंटीबायोटिक या एंटीफंगल दवाइयों से इलाज किया जाता है। इन्फेक्शन ठीक होने पर अक्सर सर्विक्स का साइज भी सामान्य हो जाता है। हार्मोन में असंतुलन होने पर हार्मोन थेरेपी दी जाती है।
कुछ मामलों में छोटा प्रोसीजर किया जाता है, जैसे सर्विकल पॉलिप (cervical polyp) को हटाना या सतह पर इंफेक्शन वाले हिस्से को कॉटराइजेशन (cauterization) या क्रायोथेरेपी (cryotherapy) से ठीक करना।
अगर फाइब्रॉइड बड़ा हो या दूसरी गंभीर समस्या हो, तो सर्जरी जैसे मायोमेक्टॉमी (myomectomy) या सर्विक्स से असामान्य सेल्स हटाने की प्रक्रिया, की जरूरत पड़ सकती है।
यह भी पढ़ें : पेरिमेनोपॉज़ क्या है?
ज़्यादातर सर्विकल सर्जरी नॉर्मल होती हैं।
सर्जरी के बाद फर्टिलिटी पर कोई असर नहीं पड़ता, बल्कि अगर फाइब्रॉइड या पॉलिप कंसीव करने में रुकावट डाल रहा था तो हटाने के बाद प्रेगनेंसी होने में आसानी रहती है।
हाइपरट्रॉफाइड सर्विक्स रिपोर्ट में दिखे तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। ज़्यादातर मामलों में इससे कुछ परेशानी नहीं होती।
डिलीवरी के बाद का प्राकृतिक परिवर्तन या छोटी नाबोथियन सिस्ट जैसी वजहों से ऐसा हो सकता है। लेकिन वजह जानना ज़रूरी है। क्रोनिक इन्फेक्शन, फाइब्रॉइड, या डिसप्लेसिया जैसी कंडीशन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ से बात करें, पैप स्मीयर कराएँ, और डॉक्टर की सलाह फॉलो करें।
यह भी पढ़ें : मासिक धर्म चक्र क्या है?