Home > आईवीएफ की सफलता दर किन बातों पर निर्भर करती है ?

पिछले कुछ दशकों में दुनिया भर में शहरीकरण, देर से विवाह और बदलती जीवन शैली की आदतों के कारण निःसंतानता बढ़ गयी है। आज के समय में उपलब्ध विभिन्न असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजीज (एआरटी) में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) जिसे आमतौर पर टेस्ट-ट्यूब बेबी कहा जाता है ज्यादातर मामलों में अधिक पसंदीदा उपचार है। कुछ समय पहले तक आईवीएफ निःसंतानता से प्रभावित मरीजों के लिए असाधारण उपचार था जिसे कुछ चुनिंदा लोग ही अपनाते थे लेकिन अब यह एक आम उपचार प्रक्रिया बन गयी है।

1978 में इंग्लैंड में जन्मी लुईस ब्राउन आईवीएफ द्वारा पैदा हुई दुनिया की पहली बेबी है। यह प्रयास निःसंतानता के इलाज में मील का पत्थर साबित हुआ । यह गर्भावस्था कई प्रयोगों और प्रक्रिया के बाद हासिल की गई थी, जो उपचार तकनीकें आज हम उपयोग कर रहे हैं उसकी तुलना में यह थोड़ी अलग थी । कई सुधार और प्रगति के बाद इसके परिणामों में वृद्धि हुई है। इसमें बेहतर क्वालिटी के इंजेक्शन, अंडे प्राप्त करने के लिए सुरक्षित तकनीक, संशोधित प्रयोगशाला उपकरण और बेहतर भ्रूण बनाने की तकनीक शामिल है।

आईवीएफ प्रक्रिया में अंडाशय में अंडों की संख्या बढ़ाने के लिए महिला को हार्मोनल इंजेक्शन देना शामिल है। एक बार जब अंडे पर्याप्त रूप से विकसित हो जाते हैं, तो अंडे को परिपक्व करने के लिए अंतिम ट्रिगर इंजेक्शन दिया जाता है। इन अंडों को शरीर से एक सरल प्रक्रिया द्वारा बाहर निकाला जाता है जिसे ओवम पिकअप कहा जाता है। उसी समय पुरुष साथी से वीर्य का सेम्पल लिया जाता है उसे निषेचन के लिए तैयार किया जाता है और फिर दोनों को भ्रूण बनाने के लिए आईवीएफ प्रयोगशाला में विभिन्न तकनीकों द्वारा मिलाया जाता है। एक बार भ्रूण बन जाने के बाद उपलब्ध सेवाओं, भ्रूण की गुणवत्ता और रोगी की स्थिति के आधार पर चिकित्सक उसी साइकिल में भ्रूण को स्थानांतरित करने या उन भ्रूणों को फ्रिज करने का निर्णय ले सकते हैं।

निःसंतानता में दम्पतियों को कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि जीवन में अपूर्णता की भावना, अवसाद और रिश्तों विटघन की स्थिति हो सकती है। भारत जैसे देश में निःसंतानता को एक सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता है और दम्पती को रिश्तेदारों और समाज से कई तरह के ताने झेलने पड़ते हैं। आईवीएफ उपचार के खर्च की अधिकता, विशेषज्ञों की अनुपलब्धता और अच्छे आईवीएफ केंद्रों की कमी के कारण अधिकांश आबादी के लिए आईवीएफ उपचार लेना बहुत मुश्किल है। साथ ही आईवीएफ उपचार लेना कुछ रोगियों के लिए असुविधाजनक हो सकता है जिसमें नियमित इंजेक्शन, अंडे निकालना, भ्रूण स्थानांतरण और अधिक दवाइयां शामिल हैं। इस प्रक्रिया से गुजरने वाला प्रत्येक दम्पती उनके मामले में सफलता की संभावनाओं को जानना चाहता है।

आमतौर पर, आईवीएफ की सफलता को प्रति साइकिल गर्भावस्था दर, प्राप्त उसाइट (अण्डे) और बनने वाले भ्रूणों के रूप में वर्णित किया जा सकता है । आईवीएफ सफलता दर के बेहतर संकेतक संचित (क्यूमूलेटिव) गर्भावस्था दर (सभी प्रयासों का प्रतिशत जिससे गर्भधारण हुआ हो ) और जीवित जन्म दर (प्रसव की संख्या जिसमें जीवित शिशु का जन्म हुआ) है।

आईवीएफ का परिणाम विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है जिन्हें रोगी से संबंधित और आईवीएफ केंद्र से संबंधित कारक में विभाजित किया जा सकता है।

आईवीएफ की सफलता की संभावना के लिए रोगी से संबंधित कारक –

निःसंतानता के निम्न प्रकारों के लिए आईवीएफ उपचार विकल्प उपलब्ध है
खराब आवेरियन रिजर्व
अण्डोत्सर्ग से संबंधित विकार
ट्यूब के कारण निःसंतानता
एंडोमेट्रियोसिस
गर्भाशय से जुड़ी असामान्यताओं के कारण निःसंतानता
सर्वाइकल कारक विकार
शुक्राणुओं की संख्या में कमी
एक से अधिक अंतगर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई) में विफलता
अस्पष्ट निःसंतानता (कोई स्पष्ट कारण नहीं पाया गया)
 
आईवीएफ उपचार के समय महिला की आयु सफलता दर तय करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक है। बढ़ती उम्र के साथ अंडाशय की अच्छे अंडे विकसित करने की क्षमता कम हो जाती है। आमतौर पर 35 साल की उम्र के बाद आवेरियन रिजर्व में गिरावट शुरू हो जाती है और 40 वर्षों के बाद यह काफी कम हो जाती है, जिससे आईवीएफ उपचार के परिणाम प्रभावित होते हैं। आवेरियन रिजर्व में यह कमी युवा महिलाओं में भी हो सकती है। ऐसे मामलों में भ्रूणों में आनुवंशिक समस्याओं के होने की संभावना अधिक होती है, जिसके लिए जेनेटिक स्टडी की आवश्यकता होती है। ऐसी महिलाओं के लिए आईवीएफ में डोनर अंडे की मदद अच्छा विकल्प है।

यदि फैलोपियन ट्यूब स्वस्थ नहीं हैं और पानी या मवाद से भरी हुई है, तो यह भ्रूण को आरोपण से रोककर या आरोपण स्थल से हटाकर आईवीएफ परिणाम को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है।

7 या 8 मिमी और उससे अधिक एंडोमेट्रियल मोटाई काफी अच्छी सफलता दर के साथ जुड़ी हुई है। पॉलीप की उपस्थिति, एंडोमेट्रियम में फाइब्रॉएड भ्रूण के आरोपण को रोक सकते हैं। गर्भाशय संबंधी रोग जैसे कि एडेनोमायोसिस (गर्भाशय में सूजन) या फाइब्रॉएड आईवीएफ के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

पुरुष कारकों में शुक्राणुओं की कम संख्या और गतिशीलता और असामान्य आकृति भ्रूण के निर्माण तथा आईवीएफ परिणाम को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं।

अन्य कारक जो सफलता की दर पर नकारात्मक डालते हैं, वे हैं लम्बी निःसंतानता की अवधि, रोगी का उच्च बीएमआई, दवाओं के प्रति खराब प्रतिक्रिया, मरीजों की अन्य चिकित्सकीय स्थिति आदि।

आईवीएफ सफलता में अच्छे आईवीएफ केंद्र की भूमिका

आईवीएफ केंद्र में कई कारक जो आईवीएफ उपचार के परिणाम तय कर सकते हैं, वे हैं परामर्शदाता, भ्रणविज्ञानी और केंद्र में उपलब्ध सुविधाएं जहां आप इलाज करवा रहे हैं।

एक विशेषज्ञ परामर्शदाता सही जांच और प्रक्रियाओं का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल कर आईवीएफ परिणामों में सुधार कर सकता है। अच्छी अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन, रक्त परीक्षण सुविधाएं परामर्शदाता को इन स्थितियों की जांच और उपचार करने में मदद करती हैं।

भ्रूण लैबोरेटरी आईवीएफ केंद्र का दिल होती है। आईवीएफ / आईसीएसआई के लिए उन्नत उपकरणों की उपलब्धता, तापमान की अच्छी निगरानी, अगर आईवीएफ लैब और इन्क्यूबेटरों के साथ-साथ आवश्यक संक्रमण रोकने वाली सावधानियां अपनायी जाएं तो अच्छे भ्रूण के निर्माण में मदद मिलती है।

ब्लास्टोसिस्ट स्टेज तक यानि 5 या 6 दिनों तक भ्रूण को विकसित करना ब्लास्टोसिस्ट कल्चर के रूप में जाना जाता है। खराब गुणवत्ता वाले भ्रूण में पर्याप्त वृद्धि का अभाव होता जबकि ब्लास्टोसिस्ट में प्रत्यारोपण की क्षमता बेहतर होती है इसलिए भ्रूण स्थानांतरण के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले भ्रूण का चयन किया जा सकता है इनमें सफल प्रत्यारोपण के अवसर अधिक होते हैं।

लेजर असिस्टेड हैचिंग के रूप में पहचानी जाने वाली प्रक्रिया में भ्रूण के बाहरी आवरण को लेजर की मदद से पतला किया जाता है ताकि आरोपण की संभावना (गर्भाशय की परत पर भ्रूण के चिपका रहना) को बढ़ाया जा सके।


निष्कर्ष –

हाल के दिनों में आईवीएफ तुलनात्मक रूप से सामान्य, आसान, कम समय लेने वाली, कम लागत, बेहतर सफलता दर वाली होने के बावजूद इस प्रक्रिया का परिणाम कई मापदंडों से प्रभावित होता है।

ऐसे कई कारक हैं जो अंततः सफलता तय करते हैं, लेकिन कम उम्र के साथ अच्छी ओवरियन क्षमता वाले मरीज, गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब विकृतियों की अनुपस्थिति, गुणवत्तायुक्त वीर्य और उन्नत सुविधाओं के साथ अच्छा आईवीएफ केंद्र बेहतर सफलता दर दे सकता है। अधिक उम्र, आवेरियन क्षमता में कमी, वीर्य की गुणवत्ता में कमी, खराब भ्रूण और उन्नत तकनीकों की कमी आईवीएफ उपचार में सफलता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

RELATED VIDEO


आप हमसे Facebook, Instagram, Twitter, Linkedin, Youtube & Pinterest पर भी जुड़ सकते हैं।

अपने प्रेग्नेंसी और फर्टिलिटी से जुड़े सवाल पूछने के लिए आज ही देश की सर्वश्रेष्ठ फर्टिलिटी टीम से बात करें।

Call now 18003092323

(Visited 232 times, 3 visits today)
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

LATEST BLOG

IVF

Ectopic Pregnancy -Symptoms & Treatments

It is the condition when...
Read More
IVF

Pregnancy Exercise

At Indira IVF, we advocate...
Read More
PCOD

What is PCOD

The full form of PCOD...
Read More
PCOS

PCOS Diet Plan

Most women who have PCOS...
Read More
PCOS

What is PCOS

Experts at Indira IVF know...
Read More
IVF

Foods Increase Sperm Count

Our fertility experts know that...
Read More
IVF

Test Tube Baby And Its Process

There are multiple reasons for...
Read More
IVF

Latest Technology in IVF

Since the first test tube...
Read More
IVF

IVF Failure – What You Need To Know

Today, with numerous technological advancements,...
Read More
IVF

New Fertility Technology and their Benefits

There are many assisted reproductive...
Read More
IVF

Evolution of Fertility Treatments and Development of IVF

Scientists saw a glimmer of...
Read More
IVF

Is there any difference between Test Tube Baby and IVF Baby?

In India, about 10-15% of...
Read More
PCOS

PCOS Awareness Month – Everything You Need to Know about PCOS and its Prevention

September 1 denotes the beginning...
Read More
IVF

A Complete IVF Guide: All You Need to Know About IVF

1. When to consult for...
Read More
IVF

Is Covid-19 Vaccination dangerous for pregnant women? Know the Benefits and Risks

What do we know today...
Read More
IVF

The Impact of Covid-19 on Pregnant Women & their Babies

Pregnant women and those in...
Read More
IVF

IVF Treatment in Covid-19 Age: Yes or No?

IVF in Pandemic: Safety Measures...
Read More
IVF

Pregnancy in COVID-19: What are the Risks?

Is the infection more dangerous...
Read More
IVF

Diet Plan for Lactating Mothers: What to eat while breastfeeding?

You know breast milk is...
Read More
IVF

आईवीएफ में जुड़वा बच्चेः आईवीएफ गर्भावस्था और एकाधिक प्रेगनेंसी

सामान्य जुड़वा बच्चे बनाम आईवीएफ...
Read More
Request Call Back
IVF
IVF telephone
Book An Appointment