एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) एक ऐसी कंडीशन है जिसमें गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की अंदरूनी लाइनिंग यानी एंडोमेट्रियम (endometrium) जैसा टिश्यू गर्भाशय के बाहर जैसे ओवरी (ovary), फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube), आँत (bowel) और पेल्विक एरिया (pelvic area) में बढ़ने लगता है। इसे चार स्टेज (stage) में बाँटा जाता है, जिनमें स्टेज 4 सबसे गंभीर मानी जाती है। स्टेज 4 में डीप इम्प्लांट्स (deep implants), मोटे एड्हीशन्स (adhesions) और ऑर्गन्स का आपस में चिपकना देखा जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह कैंसर है या इसमें प्रेगनेंसी संभव नहीं है।
इस आर्टिकल में हम आसान तरीके से समझेंगे कि endometriosis के अलग-अलग स्टेज क्या होते हैं, स्टेज 4 में शरीर के अंदर क्या बदलाव होते हैं, इसका फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ता है, और किन स्थितियों में सर्जरी या IVF की जरूरत पड़ सकती है।
नॉर्मल स्थिति में एंडोमेट्रियम (endometrium) यानी गर्भाशय की अंदरूनी लाइनिंग सिर्फ़ यूट्रस के अंदर ही होती है। हर महीने पीरियड के दौरान यह लाइनिंग टूटकर शरीर से बाहर निकल जाती है।
एंडोमेट्रियोसिस में यही टिश्यू गर्भाशय के बाहर जैसे ओवरी, फैलोपियन ट्यूब , या पेल्विक एरिया में बढ़ने लगता है। समस्या यहीं से शुरू होती है। बाहर मौजूद यह टिश्यू भी हर महीने हार्मोन के साथ एंडोमेट्रियम की ही रिएक्ट करते हैं यानी यहाँ सूजन आती है और ब्लीडिंग करते हैं, लेकिन यहाँ से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता।
इसी वजह से अंदर सूजन, दर्द, स्कार टिश्यू (scar tissue) और एड्हीशन्स यानी चिपकन बनने लगते हैं, और अंदर के ऑर्गन्स आपस में चिपक सकते हैं।
एंडोमेट्रियोसिस को rASRM यानी रिवाइज़्ड अमेरिकन सोसाइटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन (revised American Society for Reproductive Medicine) स्कोरिंग सिस्टम से क्लासिफाई किया जाता है।
इसमें देखा जाता है कि गर्भाशय के बाहर जो एंडोमेट्रियम जैसा टिश्यू बढ़ रहा है, वह शरीर के किन हिस्सों में फैला है, कितनी गहराई तक गया है, और उससे ओवरी, फैलोपियन ट्यूब और आसपास के पेल्विक एरिया में क्या बदलाव हुए हैं। इन्हीं बातों के आधार पर Endometriosis की स्टेज तय की जाती है।
Stage 4 में एंडोमेट्रियोसिस अपनी सबसे एडवांस कंडीशन में होती है। इस स्टेज पर बदलाव सिर्फ़ एक जगह तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पेल्विक एरिया के कई हिस्सों को प्रभावित करते हैं।
ओवरी पर बड़े एंडोमेट्रियोमा (endometrioma) बन जाते हैं, जिन्हें चॉकलेट सिस्ट भी कहा जाता है। इनका साइज 4 सेमी से ज्यादा भी हो सकता है। फैलोपियन ट्यूब पर एड्हीशन्स बन जाते हैं, जिससे ट्यूब मुड़ सकती है या ब्लॉक हो सकती है। इससे एग और स्पर्म के मिलने में परेशानी हो सकती है।
डीप इम्प्लांट्स सिर्फ़ ओवरी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि आँत, ब्लैडर और यूटेरोसैक्रल लिगामेंट (uterosacral ligament) तक पहुँच सकते हैं।
बहुत ज्यादा एड्हीशन्स यानी चिपकन की वजह से पेल्विक ऑर्गन्स जैसे गर्भाशय, ओवरी, ट्यूब और आँत आपस में चिपक सकते हैं। इस स्थिति को फ्रोजन पेल्विस (frozen pelvis) कहा जाता है।
कुछ मामलों में रेक्टोवैजाइनल एंडोमेट्रियोसिस (rectovaginal endometriosis) भी देखा जाता है, जिसमें ये टिश्यू रेक्टम और वैजाइना के बीच बढ़ने लगते हैं, जिससे उस एरिया में दर्द और दूसरी समस्याएँ हो सकती हैं।
गंभीर एंडोमेट्रियोसिस में लक्षण काफ़ी तकलीफ़देह हो सकते हैं।
एंडोमेट्रियोसिस की पक्की डायग्नोसिस लैप्रोस्कोपी (laparoscopy) से ही होती है। लेकिन उससे पहले कुछ टेस्ट से अंदाज़ा लगाया जाता है कि बीमारी कहाँ और कितनी है।
एंडोमेट्रियोसिस कन्फर्म करने के लिए लैप्रोस्कोपी की जाती है, जिसमें डॉक्टर सीधे इम्प्लांट्स देखकर स्टेज तय करते हैं।
Stage 4 में एंडोमेट्रियोसिस फर्टिलिटी को कई लेवल पर प्रभावित करती है।
इस वजह से इनफर्टिलिटी का रिस्क बढ़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रेगनेंसी संभव नहीं है। सही ट्रीटमेंट और IVF से अच्छे रिज़ल्ट मिल सकते हैं।
एंडोमेट्रियोसिस का ट्रीटमेंट उसके लक्षण, स्टेज और आपके प्रेगनेंसी प्लान पर निर्भर करता है।
लेकिन यह याद रखें कि एंडोमेट्रियोसिस वापस आ सकती है, इसलिए फॉलो-अप जरूरी होता है।
Stage 4 Endometriosis में IVF कई बार सबसे सीधा और असरदार तरीका बन जाता है, खासकर तब जब ट्यूब ठीक से काम नहीं कर रही हों या अंदर ज्यादा चिपकाव हो।
लेकिन यहाँ भी एक बैलेंस जरूरी होता है। अगर ओवरी पर बड़ा एंडोमेट्रियोमा है, तो पहले सर्जरी की जाए या सीधे IVF शुरू किया जाए, यह हर केस में अलग तय होता है।
कुछ डॉक्टर IVF से पहले कुछ समय के लिए हार्मोन की दवाइयाँ देते हैं ताकि बीमारी की एक्टिविटी कम हो जाए और रिज़ल्ट बेहतर मिलें।
Stage 4 में IVF का सक्सेस रेट थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन फिर भी प्रेगनेंसी के अच्छे चांस रहते हैं। कई बार एक से ज्यादा साइकिल की जरूरत पड़ती है।
अगर अभी प्रेगनेंसी प्लान नहीं है और आपका ओवेरियन रिज़र्व धीरे-धीरे कम हो रहा है, तो आप एग फ्रीजिंग करवा कर भविष्य में अपने माँ बनने के सपने को पूरा कर सकती हैं।
दवाइयों और सर्जरी के साथ-साथ लाइफस्टाइल भी एंडोमेट्रियोसिस को मैनेज करने में मदद करता है। खानपान में ऐसे फूड शामिल करना जो शरीर की इन्फ्लमेशन कम करें। अपनी डाइट में फल, सब्जियाँ और ओमेगा-3, शामिल करना फायदेमंद होता है।
हल्की और नियमित एक्सरसाइज से भी दर्द और सूजन दोनों में राहत मिलती है। साथ ही, स्ट्रेस कम रखना जरूरी है क्योंकि मानसिक तनाव लक्षणों को बढ़ा सकता है। कुछ महिलाओं को हीट थेरेपी या पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपी से भी अच्छा आराम मिलता है।
Stage 4 Endometriosis एक कॉम्प्लेक्स सिचुएशन है, लेकिन इसे सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि शरीर के सिगनलों को नजरअंदाज न किया जाए। समय पर सही जांच और सही इलाज से न सिर्फ़ दर्द को कंट्रोल किया जा सकता है, बल्कि प्रेगनेंसी के रास्ते भी बनाए जा सकते हैं।
अपने गयनेकोलॉजिस्ट या फ़र्टिलिटी स्पेशल्सिट से खुलकर बात करें और अपने Endometriosis stage 4 के ट्रीटमेंट प्लान बनाएँ।