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आईवीएफ साईकिल में असफलता के कारण | आईवीएफ साईकिल की विफलता के बारे में अधिक जानने के लिए आगे पढ़ें

निःसंतानता के दौर से गुजर रहे दम्पती के लिए निःसंतानता का उपचार शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से थकान भरा हो सकता है।

हमारे देश में जब कोई दंपती आईवीएफ साइकिल से गुजरता है इससे पहले निःसंतानता के सामाजिक कलंक को कई वर्ष झेल चुका होता है। इलाज समय, ऊर्जा और खर्च की मांग के साथ उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है। कुछ लोग बाकी सभी गतिविधियों से अलग होकर नौकरी से ब्रेक लेकर पूरी तरह अपने स्वस्थ संतान प्राप्त करने के लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करते हैं।

यह प्रक्रिया महिलाओं के लिए अधिक मुश्किल भरी है –असफल आईवीएफ साइकिल – एक असफल आईवीएफ साइकिल के पीछे के कारणों के बारे में अधिक जानने के लिए आइए सबसे पहले उन कारकों पर ध्यान देते हैं जो आईवीएफ उपचार की सफलता को प्रभावित करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण महिला साथी की उम्र है, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ अंडे की संख्या और उनकी गुणवत्ता में कमी आ जाती है, जिससे बनने वाले भ्रूण की संख्या और गुणवत्ता में फर्क आ जाता है। यहां एन्यूप्लोइड भ्रूण (भ्रूण में असामान्य गुणसूत्र) होने और आईवीएफ असफल होने की उच्च संभावना होती है।

अन्य महत्वपूर्ण कारक जिसके लिए आईवीएफ किया गया था वह हैं, अध्ययनों से पता चलता है कि एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस जैसे कारणों से किए गए आईवीएफ में ट्यूबल की समस्या या ओवुलेशन दोष या पुरुष समस्याओं के लिए किए गए आईवीएफ की तुलना में असफल होने की संभावना अधिक है। उपचार की सफलता को प्रभावित करने वाली सभी बिमारियों को सर्जरी (हिस्टेरो-लैप्रोस्कोपी), या दवाओं या विशेष परीक्षणों से पहले ठीक किया जाना चाहिए।

पहली बार आईवीएफ उपचार प्रक्रिया से गुजरने वाले दम्पती की तुलना में पिछले आईवीएफ साइकिल विफलता वाले जोड़े की अलग-अलग तरीके से जांच की जाती है । इस तरह के जोड़ों को दोनों की आनुवांशिक विकार की जांच के लिए अतिरिक्त जांच से गुजरना पड़ सकता है, भ्रूण में विशेष आनुवंशिक दोषों की जांच के लिए प्री कंसेप्शन जेनेटिक टेस्टिंग (पीजीटी) का विकल्प दिया जा सकता है। गर्भाशय की संरचनात्मक असामान्यता को देखने के लिए एक अच्छा 3 डी अल्ट्रासाउंड महत्वपूर्ण है।

इसका मतलब है कि सफलता की संभावनाओं का आकलन करने से पहले जांचों व उपचार पर अच्छे से विचार करना होगा ।

एक और बहुत महत्वपूर्ण कारक जो प्रमुख भूमिका निभाता है वह है फर्टिलिटी उपचार के लिए केंद्र का चयन। यह जानना महत्वपूर्ण है कि केंद्र का चयन कैसे करें। आमतौर पर जोड़े उपचार के लिए केंद्र का चयन करते समय दो बातों पर ध्यान देते हैं –

उपचार की लागत और उनके घर से केंद्र की दूरी

हालांकि ये दोनों महत्वपूर्ण कारक हैं लेकिन दोनों वास्तव में द्वितीयक कारक होने चाहिए। प्राथमिक उद्देश्य तो सफल साइकिल्स के साथ सर्वश्रेष्ठ परिणामों वाले आईवीएफ केन्द्र का चयन है जो विभिन्न कारको पर निर्भर है –

 केस को संभालने के लिए कुशल और अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ की उपलब्धता । डॉक्टर को जांचों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए, आवश्यक जांच की सलाह दे, अल्ट्रासोनोग्राफी (2 डी, 3 डी करें) ताकि एक उचित उपचार प्रोटोकॉल तैयार किया जा सके जो कि उक्त दम्पती के लिए फायदेमंद होगा, यह याद रखें कि सभी के लिए समान उपचार उचित नहीं है।

 कई अच्छे इनक्यूबेटर, नवीनतम तकनीक के साथ अत्याधुनिक भ्रूण प्रयोगशाला की उपलब्धता जैसे असिस्टेड हैचिंग के लिए लेजर, ब्लास्टोसिस्ट कल्चर, फ्रीज और थो करने के लिए मजबूत क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक, प्रीनेटल जेनेटिक टेस्टिंग परीक्षण सुविधा आदि…

 इनहाउस अनुभवी भ्रूणविज्ञानी की उपलब्धता जो इस तरह की लैब को कुशलता से संचालित कर सके।

 किसी भी अच्छे केन्द्र की सफलता का कारण उच्च क्वालिटी एवं सभी प्रक्रियाओं के संचालन के लिए स्टेण्डर्ड बनाए रखना होता है।

यह कहा जा सकता है कि ज्ञान और प्रौद्योगिकी में उन्नति ने आईवीएफ साइकिल में उच्च सफलता दर हासिल करना संभव बनाया है। फिर भी आईवीएफ चक्र विफल होते हैं लेकिन बार-बार प्रयास करने से सफलता मिल सकती है।

आइए अब हम उन सामान्य प्रश्नों की बात करते हैं जो आईवीएफ विफल होने के बाद दम्पती के दिमाग में आते हैं । इस समय उपचार करने वाले चिकित्सक की भूमिका को समझना भी महत्वपूर्ण है। रोगी के लिए यह सोचना बहुत आम है कि

मेरे साथ क्यों हुआ?

क्या गलत हुआ?

अब आगे क्या?

प्रत्येक प्रश्न को व्यक्तिगत रूप से समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक प्रश्न का उत्तर प्राप्त करना और समझना हमें आगे ले जाकर निर्णय करने में मदद करता है।

मैं ही क्यों?

युगल परिणाम के दिन की प्रतीक्षा करते हैं, इसको लेकर खुद को तैयार करते है, उस समय थोड़ा चिंतित और तनावपूर्ण होते हैं क्योंकि इस दिन सभी प्रयासों का परिणाम आने वाला होता है। इस समय जब उन्हें सूचित किया जाता है कि परिणाम नकारात्मक (नकारात्मक – बीटा एचसीजी) है। इससे कई दम्पतियों को झटका लग सकता है, वे उस परिणाम को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होते हैं और डॉक्टर से दोबारा जांच के लिए कहते हैं। कुछ गुस्सा, कुछ नाराज और कुछ परिणाम विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर सकते हैं लेकिन उनका दिल टूट जाता है। अस्वीकार्यता और गुस्से को समझने की जरूरत है। उपचार करने वाले डॉक्टर को यह खबर विनम्रतापूर्वक बतानी चाहिए और परिणाम के बाद के प्रयासों और सही तरीके के लिए तैयार भी रहना चाहिए।
 
चुनौतियों का सामना – दोष देना – असफल होने पर दम्पती जिस दिन से उपचार शुरू हुआ उसी दिन से पूरी उपचार योजना को फिर से खोलना शुरू कर देते हैं । केंद्र में कर्मचारियों के व्यवहार, बिलिंग, डॉक्टर की अक्षमता और सुविधाओं की कमी के बारे में असुविधा से जुड़ी बातें । यदि यह पर्याप्त नहीं लगता है तो कुछ दंपती खुद को दोष देना शुरू कर देते हैं-यह पूछने लगते हैं कि क्या उनकी किसी गतिविधि के कारण परिणाम नकारात्मक आया है। आहार से लेकर, दवाइयां लेने में भूल होना और पर्याप्त एहतियात नहीं बरतना आदि। कुछ उदास भी हो सकते हैं, निराशा की भावना से ग्रसित होकर वे बुरे दौर में चले जाते हैं।

तात्कालिक चुनौतियों से कैसे उबरें – सहानुभूति – चिकित्सक का दृष्टिकोण सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए। नकारात्मक परिणाम की खबर बहुत सावधानीपूर्वक यह सुनिश्चित कर बताएं कि पति और पत्नी दोनों मौजूद हैं। परिणाम को समझने और स्वीकार करने के लिए जोड़े को समय दें। मरीज के सामने अधिक चिकित्सा शब्दावली का इस्तेमाल नहीं करें और अगले विकल्पों के बारे में तुरन्त बात नहीं करें क्योंकि इस समय उनका दिमाग किसी नए सुझाव को समझ नहीं पाएगा । युगल क्या कहना चाहता है सुनें, भले ही वे परिणाम के लिए आपको दोष देने की कोशिश करें।

उन्हें परिणाम स्वीकार करने में मदद करें, उन्हें बताएं कि यह एक आखिरी मौका नहीं था, उनके लिए कई विकल्प खुले हुए हैं। दंपती को बताएं कि दोनों पक्षों ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है, लेकिन नतीजा कभी भी सभी स्थितियों में शत-प्रतिशत नहीं रहता है। रोगी को डेढ़ महीने (छह सप्ताह) के ब्रेक के बाद वापस आने के लिए कहें, ताकि वे दुःख से बाहर आ सकें । साथ ही उनकी हर संभव सहयता करें।

कुछ दंपती अवसाद, चिंता का अनुभव करते हैं, कुछ लोग भावनात्मक बोझ के कारण उपचार को छोड़ सकते हैं, कुछ अपना काम फिर से शुरू कर देते हैं और उपचार को फिर से शुरू करने में समर्थ नहीं होते हैं, कुछ आर्थिक तंगी के कारण, कुछ को ऐसा लगता है कि संतान सुख उनके भाग्य में नहीं है और वे हार मान लेते हैं। कुछ संबंधों में पहले से ही तनाव होता है जो इस चरण में अधिक खराब हो जाते हैं। यह जोड़ों के लिए बहुत मुश्किल समय है, कुछ स्थितियों में रिश्ते तलाक के कारण समाप्त हो जाते हैं।

उपचार करने वाले चिकित्सक की भूमिका – आपको परामर्शदाता के रूप में कार्य करना चाहिए, रोगी को फोलोअप के लिए कहें, उन्हें असफल आईवीएफ के दौरान भी प्राप्त सफलता के बारे में बताएं। दंपती जो पहली बार आईवीएफ उपचार में असफल रहे हैं उन्हें बनाये गये भ्रूण की संख्या बतायी जानी चाहिए, उन्हें बताएं कि यदि फ्रोजन भ्रूण हैं तो अगली बार उन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्हें यह भी सूचित करें कि यह एक ज्ञात तथ्य है कि असफल आईवीएफ साइकिल वाले जोड़ों को बार-बार प्रयासों के बाद सफलता मिली है। उन्हें केंद्र में अन्य जोड़ों से मिलने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है, जिनकी पिछले असफल साइकिल के बाद अब गर्भावस्था चल रही है। इससे उनका मनोबल बढ़ेगा। इस समय परामर्श और परिवार का समर्थन बहुत मददगार होता है।

क्या गलत हुआ?

एक समय के बाद ज्यादातर दम्पती अपने दुःख से बाहर आने और स्थिति को स्वीकार करने की स्थिति में होते हैं वे समझते हैं कि एक बार आाईवीएफ असफल होना अंत नहीं है। अब जब वे वास्तविकता समझ कर वापस आते हैं तो अगला सवाल जो मन में आता है वह है क्या गलत हुआ ? इस समय डॉक्टर को दम्पती के साथ आईवीएफ विफलता के संभावित कारणों पर चर्चा करनी चाहिए।

उपचार की शुरुआत में ही कुछ मामलों में, दंपति को बढ़ती उम्र, कम आवेरियन रिजर्व, खराब एंडोमेट्रियम, खराब शुक्राणु मापदंडों आदि की समस्या के बारे में बताया जाता है और इस स्थिति में डोनर प्रोग्राम अपनाने के बारे में सलाह दी जाती है (अंडाणु/ शुक्राणु/ भ्रूण) ताकि खराब मापदंडों /स्थितियों में भी सर्वोत्तम परिणाम मिल सकें लेकिन हो सकता है वे परेशानियों के बावजूद डोनर के माध्यम से नहीं, जैविक बच्चे की इच्छा रखें।

कुछ मामलों में उपचार के प्रति गैर जिम्मेदारी परिणाम के लिए हानिकारक हो सकती है। कुछ लोग पीजीटीए, करियोटाइपिंग, हिस्टेरो-लेप्रोस्कोपी आदि को नहीं अपनाते हैं इसका कारण आर्थिक तंगी भी हो सकती है लेकिन इन सभी के परिणाम खराब हो सकते हैं,जोड़ों को अच्छी तरह से काउंसलिंग करनी चाहिए अगर वे सही जांच और उपचार प्रक्रिया अपनाएं तो परिणाम सुखद हो सकते हैं।

अब आगे क्या?

एक बार जब दंपती को असफल परिणाम के संभावित कारण अच्छी तरह से समझा दिये गये हैं इसके बाद अगला कदम उनकी साइकिल की योजना बनाना है। युगल को दी गई सलाह पर ध्यान देने पर बल दिया जाना चाहिए। परिणाम को बेहतर बनाने के लिए जांच और उपचार की आवश्यकता के बारे में बताएं जिसे उन्होंने पहले नकार या छोड़ दिया था। उन्हें खुली चर्चा करने दें।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दंपती को यथार्थवादी उम्मीदें रखनी चाहिए और यह महसूस करना चाहिए कि “असफल आईवीएफ अंत नहीं है – आगे बढ़ा जा सकता है। ”

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