संतान प्राप्ति की खुशी के सामने बौना है आईवीएफ का दर्द

February 8, 2020

common causes of infertility

आईवीएफ टेस्ट-ट्यूब बेबी की प्रक्रिया है। यह दर्द रहित प्रक्रिया है। आईवीएफ को लेकर भ्रांतियां ज्यादा है जबकि यह पूर्णतया वैज्ञानिक पद्धति है, जिससे महिला मां बनने के सपने का साकार कर सकती है। विवाह के दो वर्ष के बाद भी किसी न किसी समस्या के चलते मां नहीं बन पाने वाले दम्पतियों के लिए आईवीएफ एक वरदान है। इसमें महिला के अण्डों और पुरुष के स्पर्म से ही भ्रूण बनाया जाता है और गर्भावस्था से संतान का जन्म होता है। इसमें लगाए जाने वाले इंजेक्शन से उतना ही दर्द होता है जितना एक चींटी के काटने से भी कम होता है। मरीज को डिस्कम्फर्ट नहीं होता है और इस लम्बी प्रकिया का सुखद अंत संतान प्राप्ति के रूप में भी होता है। आईवीएफ करवाने के बाद तनाव मुक्त रहना चाहिए और चिकित्सक द्वारा लिखी गयी दवाइयों को समय से लेना चाहिए।

ivf - iui

क्या है आईवीएफ

-इस प्रक्रिया में ओवरी में अंडों को उत्पादित होने के बाद उन्हें हटाकर टेस्ट ट्यूब में रखा जाता है और निषेचित होने दिया जाता है।

बाद में भ्रूण को एक इनक्यूबेटर में ले जाया जाता है और कुछ दिनों बाद गर्भाशय में वापस स्थानांतरित किया जाता है। यदि प्रेग्नेंसी फेल हो जाती है तो दूसरे भ्रूण को रखा जाता है और जब तक महिला गर्भधारण नहीं कर लेती तब तक ये प्रक्रिया जारी रहती है।

क्या आईवीएफ एक दर्दनाक प्रक्रिया है?

-आईवीएफ को लेकर लोगों के बीच कई मिथक व्याप्त हैं जबकि अब ऐसे वर्ल्ड बेस्ड अत्याधुनिक इंजेक्शन आ गए हैं जिनसे दर्द नहीं होता है। पेन से लेने वाले छोटे इंजेक्शन बाजार में है जिनसे दर्द नहीं होता है।

दवाइयां-

इस प्रक्रिया की शुरूआत सबसे पहले दवाइयों से होती है। इस प्रक्रिया के लिए दी जाने वाली दवाइयां अण्डाशय को उत्तेजित करती हैं ताकि अंडों का उत्पादन हो। ऐसा करने से ओवरी में कई अंडे उत्सर्जित हो जाते हैं।

भारी गतिविधियों से बचें –

इस प्रक्रिया को करवाने की शुरूआत से ही एक महिला को कुछ बातों का ध्यान रखना होता है। दौड़ना, ड्राइविंग, तेज चलना, स्वीमिंग या भारी सामान को उठाना आदि मना होता है।

एग रिट्राईवल या अंडों की पुनर्प्राप्ति

– कुछ दिनों के बाद, अंडों को प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इसमें उत्तेजित अंडों को बाहर निकालना शामिल है। अण्डों को शरीर से बाहर निकालने के लिए महिला को 10 से 15 मिनट के लिए बेहोश किया जाता है। अल्ट्रासाण्ड इमेजिंग की निगरानी में एक पतली सुई की मदद से अण्डे टेस्ट ट्यूब में एकत्रित किए जाते हैं जो कि लैब में दे दिए जाते हैं। इस प्रक्रिया के बाद कुछ ही घंटों में महिला अपने घर जा सकती है। इस प्रक्रिया में थोड़ा दर्द जो किसी इलाज के दौरान होता है उतना ही होता है। इंजेक्शन और हारमोन्स की वजह से मूड जरूर उखड़ा रहता है, सूजन आ जाती है और थोड़ा दर्द रहता है, जो एक बच्चा प्राप्त करने की खुशी के सामने बौना है।

दर्द और ऐंठन

– इस प्रक्रिया के दौरान शुरू में पेट में दर्द और सूजन होती है और पेट ऐसा लगने लगता है कि महिला गर्भवती हैं। पेट की त्वचा में कसाव होने लगता है। थोड़ी खुजली होती है। कपड़े ढीले पहननना पसन्द आते हैं, यह गर्भावस्था में होना आम बात है।

सोने की स्थिति

– सूजन को कम करने के लिए, डॉक्टर द्वारा महिला को सही स्थिति में सोने की सलाह दी जाती है। दरअसल अंडा हटाने की प्रक्रिया में अंडाशय थोड़ा प्रभावित होता है जिससे दर्द और सूजन होती है। अगर ऐसे में महिला को सही पोश्चर में सोने की सलाह दी जाती है।

दुष्प्रभाव

-आईवीएफ प्रक्रिया का कोई शारीरिक दुष्प्रभाव नहीं होता है जो बाद में दिक्कत दे। लेकिन इससे मल्टीपल प्रेग्नेंसी हो सकती है। इस प्रक्रिया को करवाने से पहले महिला मानसिक रूप से खुद को तैयार रखें और परिवार व पति का सहयोग लेती रहें।

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